शौचालय राजनीति नहीं घोटाला है….ये चुनाव तो एक बहाना है
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 भाजपा-कांग्रेस भाई-भाई सबने मिल कर चट कर दी मलाई आरोप प्रत्यारोप में क्या रक्खा है…जांच करा लो यह तो घोटाले पर एक पर्दा है

जनाब यह रायगढ़ है। यहां शौचालय एक प्रेम कथा या राजनीति नहीं है, बल्कि एक घोटाला है। इस घोटाले में भाजपाई-कांग्रेसी ही नहीं बल्कि अधिकारी-कर्मचारी और हितग्राही भी शामिल हैं। मतलब पूरा का पूरा यहां गोलमाल है। यही कारण है कि करोड़ों का शौचालय घोटाला मामला अब तक कई जांच प्रक्रियाओं से गुजरकर भी जस का तस है। शौचालय की कमाई खा कर ठेकेदार सहित संबंधित लोग न केवल डकार मार चुके हैं, बल्कि वो तो यह भी भूल गए कि उन्हेांने कभी ऐसा घोटाला किया भी था।
अब यह तो चुनाव की तासीर है कि कुछ गड़े मुर्दे उखाडऩे पड़ते हैं। वर्ना जनता राजनैतिक पार्टियों ेसे आने वाले समय में आप क्या विकास करने वाले हैं यह पूछ लेगी। और यदि पार्टियां गड़े मुर्दों को उखाडऩे में कामयाब रहीं तो फिर उनका काम तो कम से कम चुनाव निपटने तक हो
गया समझिये।
अब मुद्दे पर आईये…। किसे नहीं पता है कि रायगढ़ नगरनिगम में करोड़ों का शौचालय घोटाला हुआ है। किस-किस ठेकेदार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में अपनी सहभागिता रखी है। यह सभी को पता है। न तो नगर निगम की जांच एजेंसी इससे अनजान है और न ही प्रशासन की जांच टीम ही अंजान है। बस वो कार्रवाई नहीं करना चाहते। अपनी रिपोर्ट तब तक नहीं बनाते जब तक गड़बड़ी करनेवाला व्यक्ति या एजेंसी उस गड़बड़ी पर लीपापोती न करले। यह किसे नहीं पता कि जांच होती ही इसलिए है कि वो आरोपियों को बचा सकें। अन्यथा जांच हो और आरोपियों के गले में माला सज रही हो भला ऐसा कभी हो सकता है। जब आप देखें कि आरोपी के गले नप नहीं रहे हैं, उन गलों में माला है तो समझिये कि जांच किस लिए हो रही थी। इस घोटाले की जांज भी कुछ इसी लिए
कराई गई।
हालांकि नगरनिगम से न सही लेकिन जिला प्रशासन की अेार से जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में गठित टीम से घोटाले के पर्दाफास होने और आरोपियों को उनके किए की सजा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वहां भी वही हुआ जो निगम की टीम ने किया।
सरकारी करोड़ों रुपयों की कीमत शायद प्रशासन भी नहीं पहचान पा रहा है। उसे नगरनिगम की ओर से इस घेाटाले के पूरे तथ्य न उपलब्ध कराकर गुमराह कर दिया गया। और प्रशासन की टीम उस भूल भुलैया में पड़ कर कुछ जानते हुए तो कुछ अनजाने में आरोपियों के आगे पर्दा बन कर खड़ी हो गई।
इधर एक सोची हुई चुनावी रणनीति के तहत पहले खरसिया विधानसभा क्षेत्र के नंदेली के ओडीएफ घोटाले को सामने लाया गया। ताकि कांग्रेस की ओर से यहां के विधायक को निगम में टायलेट के घोटाले से घेरा जा सके। अब आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी है। मुद्दा वहीं है। और घोटालेबाज चैन की बंशी बजा रहे हैं।
कांग्रेस ने कहा कम कैसे हो गए घोटालेबाज, इधर भाजपा का पलटवार
शौचालय घोटाले में दोषियों का नाम हटाये जाने एवं आंतरिक रिपोर्ट में जिनका भी नाम सामने आया था लेकिन इसके बाद उसके नाम को हटाये जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराया और करवाई की मांग की गई। दरअसल इस मामले में निगम के कुछ ठेकेदारों द्वारा नगर में बड़ी संख्या में शौचालय निर्माण का ठेका लिया गया था जिसके नाम को राजनीतिक दबाव से हटा दिया गया। जबकि जांच में सब कुछ पानी की तरह साफ मिला था। शौचालय घोटाले में आये सभी पर तत्काल कारवाही करने की मांग को लेकर नगर कांग्रेस ने सौपा जिला कलेक्टर को ज्ञापन। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्यरूप से छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस सयुक्त महासचिव नागेन्द्र,जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष संतोष राय, जिला कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष असरफ खान,नगर कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव,नगर कांग्रेस उपाध्यक्ष विकाश ठेठवार,पार्षद कमल पटेल,कांग्रेस आई टी सेल लोकसभा अध्यक्ष वसीम खान,अमृत काटजू, नौशाद अख्तर अंसारी,अनिता ओगरे,पिंटू यादव,सरिता पाण्डेय, बरखा सिह,नीरज साहू,वकील अहमद सिद्दीकी, श्यामलाल सारथी,दिवाकर सिह,राजेन्द्र धिरहि,राशीद खान, भारद्वाज आदि उपस्थित थे। दूसरी ओर भाजपा की ओर से हितग्राहियों की अेार से जारी शपथ-पत्र को सामने लाकर कहा जा रहा है जिनके घर में शौचालय बने हैं, वो शपथ-पत्र दे रहे हैं। फिर भी कांग्रेस मुद्दा बनाते हुए भाजयुमों के जिला अध्यक्ष विकास केडिया सहित अन्य भाजपाईयों पर अनर्गल आरोप लगा रही है।

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