हैंडपंप का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं बच्चे
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जिले के दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को उनके गांव घर के नजदीक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने एवं लाल पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रशासन के द्वारा सोलर हैंडपंप लगाने का काम किया गया है। वहीं विभाग का दावा है कि जिन स्थानों में लाल पानी की ज्यादा समस्या है वहां आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना की गई है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आज भी लाल पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और विभाग के दावों की पोल खुल रही है। यहां तक कि स्कूली बच्चों को भी हैंडपंप के लाल पानी का सेवन करना पड़ रहा है। जिले के बगीचा विकासखण्ड सहित अन्य विकासखंडो में ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को पेयजल लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के कई हैंडपंपो से लाल पानी निकलने के कारण उस पानी कर उपयोग ग्रामीणों के द्वारा पेयजल के रुप में नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों को पेयजल के लिए होने वाली असुविधा और लाल पानी से निजात दिलाने के लिए गांव गांव में सोलर हैंडपंपो की स्थापना किए जाने की बात पीएचई विभाग के द्वारा कहा जाता है, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है, जिसके कारण आज तक लोगों को लाल पानी की समस्या से निजात नहीं मिल पाया है और ग्रामीण मजबूरी में लाल पानी का उपयोग कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार जिले के बगीचा विकास खंड के ग्राम पंचायत सन्ना के बलादरपाठ के ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। आज भी यहां के ग्रामीण पेयजल के लिए हैंडपंप के भरोसे में ही हैं। लेकिन इस क्षेत्र के आधे से अधिक हैंडपंपो से लाल पानी आने की शिकायत है, एक दो हैंडपंप से ही उन्हें साफ पानी मिल पाता है। जिसके कारण उन्हें पेयजल लेने के लिए कभी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्कूली बच्चे कर रहे हैं लाल पानी का सेवन- बगीचा विकासखंड के सन्ना ग्राम पंचायत के बलादरपाठ में बालक आश्रम स्थित है। इस आवसीय विद्यालय में पहाड़ी कोरवा जनजाती के लगभग 50 से 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। इस आश्रम के परिसर में पेयजल के लिए मात्र एक हैंडपंप की स्थापना की गई है। पेयजल के लिए जिस हैंडपंप की स्थापना की गई है उसमें से भी लाल पानी निकलता है और मजबुरी में बच्चे लाल पानी का ही सेवन कर रहे हैं। यह आश्रम गांव से 1 किलोमीटर के दूरी पर बनाया गया है और परिसर के आसपास किसी भी ग्रामीण का घर नहीं है। गांव से आश्रम की दूरी को देखते हुए ही यहां एक हैंडपंप की स्थापना की गई थी। यदि यहां के बच्चों को साफ पानी लेना हो तो उन्हें एक किलोमीटर का सफर करना पड़ता है।
बच्चे पड़ रहे बीमार- इस आवासीय स्कूल में रहने वाले छात्र हैंडपंप के लाल पानी का ही उपयोग पेयजल के रुप में किया जाता है, जिसके कारण यहां के छात्र बिमार होने लगे हैं। छात्रों के लगातार बीमार होने के कारण यहां से छात्र अपने घर चले जाते हैं। जिसके कारण अब यहां की दर्ज संख्या में भी कमी आ रही है।

वहीं पीएचई विभाग के द्वारा दावा किया जाता है कि जिन स्थानों में लाल पानी की ज्यादा शिकायतें हैं वहां आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना की गई है, जिससे की ग्रामीणों को लाल पानी से निजात मिल सके। बलादरपाठ के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कहीं भी आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना नहीं की गई है।

News Reporter

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