जशपुर के जंगलों पर तस्करों की नजर, धड़ल्ले से पेड़ कटाई जारी
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जिले में ग्रामीण क्षेत्रों से सटे जंगलों से इमारती लकड़ी के साथ-साथ अवैध जलाऊ लकड़ी का कारोबार भी दिनो दिन व्यापक स्तर पर फल-फूल रहा है। कभी भार एवं बोझा से निस्तार के लिए जलाऊ लकड़ी लाने का सिलसिला अब साईकिलों एवं वाहनों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। प्रतिदिन भार एवं बोझा के साथ साईकिल एवं वाहनों से एक अनुमान के अनुसार प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ क्विंटल जलाऊ लकड़ी का कारोबार हो रहा है। इन लकडिय़ों का प्रयोग होटलों, ढ़ाबों, अवैध शराब निर्माताओं आदि के साथ रिहायशी घरो में भी होने लगा है। व्यवसायिक गैस के बढ़े दाम के कारण भी होटलों व ढ़ाबों में जलाऊ लकड़ी का प्रयोग बढ़ गया है। कभी कभी विभाग के द्वारा दिखावे के लिए इस व्यवसाय में लिप्त लोगों पर छोटी मोटी कार्यवाई की जाती है और इसे प्रचारित भी कर दिया जाता है लेकिन प्रतिदिन हो रहे इस व्यवसाय पर अंकुश नही लग पा रहा है। धीरे धीरे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के द्वारा यात्री बसों के माध्यम से भी इसकी तस्करी प्रारंभ कर दी गई है। वनांचल के मध्य से गुजरने वाले मार्गो पर जलाऊ लकड़ी तस्करों के द्वारा दिन दहाडे सड़क के किनारे लकडिय़ों का संग्रहण कर व्यवसायिक रूप से अवैध व्यवसाय खुलेआम किया जा रहा है। एक ओर जहां इस अवैध व्यवसाय के कारण क्षेत्र के जंगल उजड़ रहे है वही दुसरी ओर अवैध देशी शराब बनाने का कारोबार भी दिनोदिन बढ़ रहा है।
क्षेत्र में पैदा होने वाली महुवा की फसल का प्रयोग कर अवैध शराब निर्माण का व्यवसाय बढऩे के साथ जलाऊ लकड़ी की मांग भी बढ़ गई है जिसकी आपूर्ति के लिए तस्करों द्वारा साईकिल एवं अन्य वाहनों का प्रयोग भी लकड़ी तस्करी के लिए किया जाने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार थोड़ी बहुत जंगलो की सुरक्षा हाथियों के आतंक के कारण ही हो पा रही है अन्यथा वन प्रबंधन समितियां एवं वन विभाग इस तस्करी पर रोक लगाने में सफल नहीं हो पा रहा है।

News Reporter

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