जिले भर में 15 टंकियों से भी नहीं हो पा रही जलापूर्ति, ग्रामीण को हो रही परेशानी
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 सेहत के लिए हानिकारक पानी पीने को मजबूर हैं प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण

जिले के कई गांवों के लोगों को आज भी पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। विभाग के द्वारा ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों में पानी टंकी का निर्माण कराया गया है। निर्माण कराने के बाद भी इन पानी टंकियों का उपयोग नहीं हो रहा है और ये गांव में शो पीस बनकर रह गया है। विभाग की अनदेखी के कारण वर्षो बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल पहुचाने के लिए लागू की गई नलजल योजना की स्थिति जिले में बेहतर नहीं है। विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रोंं में पंचायत स्तर पर लाखों की लागत से बनाए गए पानी टंकी सालों से शो पीस बन कर खड़े हुए है। कहीं तकनीकि खराबी तो कहीं भूजल स्तर ना होने से बोर के फेल हो जाने से नल जल योजना सफल नहीं हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल की सुविधा की कमी के कारण लोग खेत में बने डबरी, नदी और तालाब जैसे जल स्त्रोंतो के पानी का उपयोग करते हैं जो सेहत के दृष्टि से सही नहीं है। असुरक्षित पानी के उपयोग से पेट और त्वचा संबंधी बीमारियों का शिकार होना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने नल जल योजना की शुरूआत की थी, यह योजना शहर से लेकर पंचायत स्तर के लिए व्यापक स्तर पर तैयार किया गया था। शहरी क्षेत्र में यह योजना का अच्छा प्रतिफल देखने को मिला, लेकिन जशपुर जिले में ग्रामीण क्षेत्र में इस योजना को सफलता नहीं मिल पाई।
15 टंकियों से नहीं हो रही पानी की आपूर्ति : लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के 8 विकास खण्ड में 101 पानी टंकी का निर्माण कराया गया है। जिसमें से कुनकुरी में 7, मनोरा में 5, कुनकुरी में 14, दुलदुला में 9, फरसाबहार में 16, कांसाबेल में 14, बगीचा में 16 और पत्थलगांव में 20 पानी टंकियों का निर्माण की स्वीकृति दी गई है। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इनमें से 97 टंकियों का निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है। लेकिन इन निर्माण किए गए टंकियों में से 15 पानी की टंकियों से लोगों को पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। पानी की आपूर्ती नहीं होने के कारण ये टंकियां अब गांवों में लोगों के लिए शो पीस बन कर रह गई है।
243 हैंडपंपों पर आश्रित हैं ग्रामीण: जिले के 6 ग्राम पंचायत में प्रशासन के द्वारा पेयजल की सप्लाई करने के लिए कोई उचित ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यहां के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिसके कारण यहां के लोग आज भी पेयजल के लिए कुओं में ही आश्रित है। ग्रामीणों के द्वारा आज भी कुओं और हैंडपंप के माध्यम से ही पेयजल का इस्तेमाल कर रहे हैं। पीएचई विभाग के द्वारा सारुडीह में 13 हैंडपंप, घोलेंग में 36 हैंडपंप, घाघरा में 39, भेंलवा में 50, भितघरा में 86 एवं चम्पा में 32 हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। इन्ही हैंडपंपो के माध्यम से ग्रामीण पेयजल की व्यवस्था कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि हैंडपंप नहीं होने से ज्यादा परेशानी होती।
ग्रामीणों को नहीं मिला एक बूंद भी पानी : जिले में नल जल योजना की बदहाली की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय के नजदीकी पंचायतों में ही सालों से निर्मित पानी टंकी शो पीस बन कर खड़े हुए है। इन टंकियों से पानी आपूर्ति शुरू करने की प्रशासन की कवायद पूरी तरह से विफल हो गई। जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत सारूडीह में पानी टंकी का निर्माण कराया गया और लोगों को टंकी से पानी देने के लिए टोटी भी लगा दिया गया। लेकिन जब उसकी टेङ्क्षस्टग की गई तो वह सफल ही नहीं हुआ। इसी तरह ग्राम पंचायत घोलेंग में भी पानी टंकी का निर्माण कराया गया है, लेकिन इस टंकी से आज तक एक बूंद भी पानी लोगों को नहीं मिला है।

News Reporter

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