हाईकोर्ट ने नहीं किया टॉपर छात्रा का अंक कम, याचिका खारिज
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हाईकोर्ट ने एमजेएमसी में टॉप करने वाली छात्रा का अंक कम कर गोल्ड मेडल प्राप्त करने के अवसर से वंचित करने के निर्णय को खारिज कर छात्रा को परीक्षा सत्र 2011-2012 का टॉपर घोषित किया है।
याचिकाकर्ता परमिता शुक्ला ने शिक्षा सत्र 2011-2012 में पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय से एमजेएमसी डिग्री ली। परिणाम घोषित होने पर छात्रा विश्वविद्यालय में टॉपर रही। इसके बाद विश्वविद्यालय ने टॉप करने वालों छात्रों की गोल्ड मेडल प्रदान करने सूची जारी की। इसमें छात्रा का अंक कम कर नीचे कर दिया गया। पूरे विश्वविद्यालय में टॉप करने के बाद भी गोल्ड मेडल प्राप्त करने से वंचित किए जाने के खिलाफ छात्रा ने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। विश्वविद्यालय ने जवाब प्रस्तुत कर कहा कि याचिकाकर्ता ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन दिया था। इसमें उसका अंक कम हो गया है। अंक कम होने के कारण याचिकाकर्ता टॉपर नहीं है। विश्वविद्यालय के जवाब पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति करते हुए कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता पहले ही टॉपर रही। ऐसे में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन देने का प्रश्न ही नहीं है। उन्होंने कभी भी इसके लिए आवेदन नहीं दिया है। इस पर कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत आवेदन का हस्तलेख विशेषज्ञ से जांच करा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। हस्तलेख विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट में आवेदन पर याचिकाकर्ता का हस्ताक्षर नहीं होने रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने याचिकाकर्ता को उक्त शिक्षा सत्र के लिए टॉपर घोषित किया है।
विवाद के बाद रोका गया कार्यक्रम
छात्रा के अंक कम होने तथा उसके हाईकोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूची विवादित हो गया। विवाद उत्पन्न होने पर विश्वविद्यालय ने वर्ष 2012 में टॉपरों को गोल्ड मेडल देने के कार्यक्रम को स्थगित किया है। शिक्षा सत्र 2011-2012 में टॉप करने वाले किसी भी छात्र को गोल्ड मेडल नहीं दिया गया है।

News Reporter

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