चाम्पा थाना मे बैठा मुहरिम पुलिस विभाग की थू-थू करवाने मे तुला
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दुख विपत्ति व संकट पडऩे पर तथा अपराध घटित होने पर आम आदमी भगवान के बाद पुलिस को याद करता है, पुलिस को इस कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। यह स्लोगन किसी महापुरुष व कवि का कथन नही है यह पुलिस विभाग द्वारा थानों व चौकियों में लिखा स्लोगन है। जो पुलिस कर्मियों को अपने कर्तब्य के प्रति ईमानदार रहने की सीख देता है। जिससे जनता कोई भी दुख व पीड़ा होने पर बिना डर के पुलिस के पास सहायता के लिए आ सके। लेकिन इस स्लोगन को चाम्पा थाना में बैठा एक मुहरिम ठेंगा दिखा रहा है। उसके द्वारा थाना में आये प्रार्थियों से अभद्र व्यवहार किया जा रहा है उसके बोले हुए शब्द ऐसे होते है जैसे मधुमक्खी भी डंक मारे तो उतना दर्द ना हो जितना उसके बातों से होता है। थाना में रोजाना कई लोग शिकायत पत्र लेकर या रिपोर्ट दर्ज कराने आते रहते है। जिससे उनके समस्या का हल हो सके। इनमें से कई अनपढ़ व अपंग व्यक्ति भी रहते है। जो अपनी बात केवल मुँह से बोल सकते है। जिसकी बातों को सुनकर थाना में बैठा मुहरिम अपने रोजनामचा में लिखता है।लेकिन चाम्पा थाना में बैठा मुहरिम प्रधान आरक्षक छबिलाल कश्यप प्रार्थियों से इस तरह से पेश आता है। जैसे प्रार्थी से उसकी कोई पुरानी दुश्मनी हो। जिससे थाना में आये कई प्रार्थी उलटे पाँव चले जाते है। इस तरह का व्यवहार पुलिस को नही करनी चाहिए। क्योंकि वह रक्षक है भक्षक नही। पुलिस के कई अधिकारी ऐसे भी है जो जनता के लिए कई सराहनीय काम किए है जिसका जिक्र लोगो के बीच होता रहता है जैसे कि पूर्व थाना प्रभारी प्रदीप आर्य ने चाम्पा में घूम रहे। एक मंदबुद्धि बुजुर्ग का इलाज कराया। और उसके परिजनों की तलाश की गई । जिसकी सूचना मिलने पर उसके परिजन चाम्पा लेने आए थे। और थाना प्रभारी का आभार व्यक्त किया था। ऐसे ही पूर्व पुलिस कप्तान अजय यादव थाना के दौरे पर सक्ति जा रहे थे। जिसके द्वारा सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अपने वाहन में बैठा कर सक्ति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया ।और उसकी जान बचाई गई थी। तो ऐसे कई प्रसंशनीय कार्य जिला पुलिस द्वारा की गई है लेकिन छबिलाल जैसे पुलिस कर्मी वर्दी को बदनाम करने में लगे हुए है।वही छबिलाल कश्यप के व्यवहार से प्रार्थी तो प्रार्थी चाम्पा थाना के अन्य पुलिस कर्मी भी खासे परेशान है। नाम ना छापने के शर्त पर एक आरक्षक ने बताया कि उसका व्यवहार अन्य पुलिस कर्मियों से भी सही नही है जिसकी शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों से की जा चूंकि है। ऐसे में जिला पुलिस कप्तान को ऐसे मामले पर संज्ञान लेकर जरुर ध्यान देना चाहिए।

News Reporter

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