चिरायु ने दी अर्पित को सुनने की शक्ति
Please Share the Post

चिरायु योजना अंतर्गत बरमकेला की चिरायु टीम ने एक और ऊंचाई को छुआ है जब से चिरायु की टीम ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना प्रारंभ किया है तब से अलग-अलग प्रकार के गंभीर बीमारियों का नि:शुल्क इलाज का लाभ लोगों को मिल रहा है। आंगनबाड़ी व स्कूली बच्चों के चेहरे पर चिरायु की टीम ने मुस्कान लाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। रायगढ़ जिले के लिए एक गौरव का विषय है जिस भूमिका को बरमकेला की चिरायु टीम ने निभाई है। यह कहानी है बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े मानिकपुर की जहां निवासरत निरंजन लाल निषाद के पुत्र अर्पित निषाद उम्र 3 वर्ष जो कि जन्मजात बधिरता से ग्रसित था जिसकी पहचान बरमकेला चिरायु टीम के अधिकारी डॉ0 प्रभुदयाल खरे एवं कर्मचारियों द्वारा 19 मई 2018 को आंगनबाड़ी केंद्र बड़े मानिकपुर में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान किया था जो जन्मजात बीमारी की श्रेणी में आता है। जिसमें बच्चा कुछ भी सुन नहीं पाता, जांच उपरांत बेहतर इलाज व नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ हेतु चिरायु की टीम ने जतन केंद्र रायगढ़ भेजा, जहां स्मिता महोबिया (ऑडियोलॉजिस्ट) द्वारा गहन परीक्षण 3 से 4 माह तक करने पर पाया गया कि बच्चे को सुन सकने हेतु कॉकलियर इम्प्लान्ट्स नामक सर्जरी की नितांत आवश्यकता है जो केवल मेडिकल कॉलेज रायपुर में ही संभव होना बताया गया, तत्पश्चात चिरायु की टीम ने बच्चे को रायपुर में (ऑपरेशन)ईलाज के लिए ले जाने सारी प्रकिया कराई और मेडिकल कॉलेज रायपुर में नाक,कान,गला विभाग के डॉ0 हंसा बंजारा व टीम के द्वारा 3 माह तक थेरापी कराने के बाद अंतत: 6 दिसंबर 2018 को सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट नामक सर्जरी नि:शुल्क किया गया, बच्चा अभी स्वस्थ है। जिसे फिर सुनने के अभ्यास हेतु थेरापी जतन के ऑडियोलॉजिस्ट द्वारा किया जाएगा। इस तरह से रायगढ़ जिले के लिए दूसरी बड़ी कान से संबंधित सफल ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क व नि:स्वार्थ करवाया गया। इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में अर्पित के पिता निरंजन लाल व माता दयामती, डॉ0अवधेश पाणिग्रही (बी.एम.ओ.), डॉ0 प्रभुदयाल खरे(चि0अधि0 चिरायु), डॉ0बबीता पटेल (चि0अधि0 चिरायु ), प्रवीण पाणिग्रही,कविता पटेल (फार्मासिस्ट ), अनीता, मेनका (ए.एन.एम.), स्मिता महोबिया जतन केंद्र, व मोहन पटेल (शिक्षक भिखमपुरा) का विशेष सहयोग व मार्गदर्शन रहा।
क्या कहते है डॉक्टर
सामु. स्वास्थ्य केन्द्र बरमकेला -जन्मजात बधिरता की शिकायत अक्सर आंगनबाड़ी व स्कूली बच्चों में देखने को मिलती है मगर त्वरित व सफल निदान महज 6वर्ष के उम्र तक ही की जा सकती है तथा इस प्रकार के ऑपरेशन में लगभग 4 से 5 लाख रुपये लगते हैं जो आम व गरीब तबके के लोगों के लिए सम्भव नहीं है। मगर चिरायु योजना या मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत यह नि:शुल्क किया जाता है।
डॉ0 प्रभुदयाल खरे
चिकित्सा अधिकारी (चिरायु)

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *