ओडीएफ घोषित किए जाने के बाद भी कई घरों में नही है शौचालय
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शौचालय के नाम पर सिर्फ गड्ढेे खोद कर छोड़ दिए गए

स्वच्छ भारत मिशन में बनाए गए ओडीएफ शौचालय जमीन पर किस तरह से बनाए गए हैं, इसकी बानगी खरसिया के बरभौना गांव में देखी जा सकती है. जहां पंचायत को ओडीएफ घोषित किए जाने के बाद भी कई घर ऐसे हैं, जहां शौचालय के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए हैं. शौचालय निर्माण को लेकर गांव वालों में यहां के सरपंच सचिव के खिलाफ गहरी नाराजगी है.
प्रशासन द्वारा भले ही कागजों में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों की हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है. जहां एसबीएम का ओडीएफ कार्यक्रम कमाई करने का एक बेहतरीन धंधा बन गया, जिसमें हितग्राहियों को छोड़कर सभी लोगों को वित्तीय लाभ हुआ. ऐसे ही एक पंचायतों में शामिल है खरसिया जनपद क्षेत्र का बरभौना. जिला मुख्यालय से दूरी और छाल के जंगलों के बीच बसे इस गांव में शायद ही कभी एसबीएम की टीम जांच के लिए पहुंचती रही हो. जिसका लाभ यहां के सरपंच और सचिव द्वारा जमकर उठाया गया. लगभग 7 से 8 सौ की आबादीवाले गांव में ज्यादातर लोगों में सरपंच सचिव के खिलाफ नाराजगी है. इस नाराजगी का कारण गांव में विकास के नाम पर किए गड़बडिय़ों को बताया गया है. विशेषकर ओडीएफ की स्थिति ऐसी है कई घरों में टॉयलेट निर्माण के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, वहीं कई शौचालय में टॉयलेट का निर्माण ही नहीं हुआ है, जिनमें पंचायत की रोजगार अधिकारी भी शामिल हैं. गांव के इंद्रजीत झरिया ने बताया दो शौचालय का निर्माण स्वीकृत किया गया, लेकिन दोनों ही अधूरे हैं. इसी तरह से श्रवण कुमार सहित दूसरे लोगों ने बताया कि उनके यहां सिर्फ गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया.
”बरभौना सचिव के खिलाफ कई शिकायते हैं, जिनमें जांच भी चल रही है, अगर ओडीएफ में गड़बड़ी की गई है तो निश्चित रूप से उसकी जांच कराई जाएगी, जिसमें सरपंच सचिव के खिलाफ कार्रवाई संभव
ओपी शर्मा, सीईओ, खरसिया जनपद

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