हम अपने अंदर देेखें तो दिखाई देगा ईश्वर : शारदानंद
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भागवत कथा पं. कमलाकांत ने सुनाई अमृत मंथन की कथा, कथा से भाव विभोर हुए श्रोता

देवी सम्पद मण्डल रायगढ़ ईकाई द्वारा स्थानीय ढिमरापुर स्थित दयाल वाटिका में आयोजित हरिहरात्मक यज्ञ संत-सम्मेलन एवं श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के छठवां दिवस प्रात: ब्रम्ह मुहुर्त में प्रात: स्मरणीय परमपूज्य सद्गुरूदेव स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा शुक्ल यजुर्वेदिय रूद्राष्टाध्यायी वेद मंत्रो के सस्वर पाठ सहित दिव्य रूद्राभिषेक किया गया तथा अपने आशीर्वचन उद्बोधन में कहा कि मनुष्य की छाया हमेशा उसके साथ रहता है छाया शरीर से कभी अलग नहीं होता। उसी तरह भगवान से जीव अलग नहीं हो सकता। वह ईश्वर हमारे अन्दर ही है, हम उसे खोजने का प्रयास ही नहीं करते, यदि हम अपने अंदर देखें तो ईश्वर दिखाई देंगे। संतश्री ने स्नान का महत्व बताते कहते है कि आकाश में जब तारे दिखाई देते रहें तब स्नान करना देव स्नान है, सूर्योदय के पूर्व स्नान मनुष्य स्नान है, परन्तु सुर्योदय होने के बाद का स्नान राक्षस स्नान है। हमें जब दु:ख आता है, तब फटे गुब्बारे की तरह पिचक जाते हैं, तथा जब सुखी होते हैं, तब गुब्बारे की तरह फुल जाते है, यही अहंकार है, इसे छोडऩा चाहिए। सुख में भी और दु:ख में भी हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। हम घर बनाते हैं और कहते हैं मेरा घर है, परन्तु घर के दीवार में चलने वाली छिपकली हमें घर से बाहर कर देती है। हम काल रूपी सर्प से डरते हैं क्योंकि हम उसके रहस्य को नहीं जानते परन्तु सांप पकडऩे वाला बिलकुल नहीं डरता, उसे अपने पास रखता है, उसी तरह ज्ञानी इस संसार के रहस्य को जानता है इसलिये संसार से नहीं डरता वह उस परमात्मा के रहस्य को जानता है। आकाश से देवतागण पुष्पवृद्धि रूपी जल वर्षा से पूरा रायगढ़ शहर आप्लावित हो रहा था। प्राज: 8:30 बजे यज्ञाचार्य विप्रो द्वारा 21 कुण्डीय यज्ञवेदी पर देवताओं का आव्हान कर आहुति प्रदान करने लगे देवता गण साक्षात उपस्थित होकर वर्षा करने लगे। 9:00 बजे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ कथावाचक पं. कमलाकांत पाण्डेय जी द्वारा सुमधुर भजनों के परम पवित्र भागवत कथा क्रम में गजेन्द्र उद्धार से कथा प्रारंभ हुई, ग्राह काल है, सरोवर संसार है, उसमें हम गोता लगाने आये हैं, अहंकार के साथ सरोवर में प्रवेश करेंगे तो काल रूपी ग्राह हमें पकड़ लेगा, तब हमें बचाने के लिये भगवान के सिवा और कोई नहीं है, इसलिये भगवान का याद करो, उसका भजन करो। कथा को आगे बढ़ाते हुए सुन्दर भाव से समुद्र मंथन की कथा सुनाई, कुर्म अवतार की कन्या कच्छप अवतार लेकर मंदराचल पर्वत की रक्षा की, समुद्र मंथन के पश्चात् भगवान नारायण विश्व मोहनी रूप से देवताओं को अमृत पान कराया। भगवान का वामन अवतार की कथा, बली राजा की कथा सुन्दर
भाव से सुनाया।

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