अनुभव किया जाता है परमात्मा दिखाई नही देता : शारदानंद
Please Share the Post

 श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह पर झूम उठे श्रद्धालु दयाल वाटिका हुआ कृष्णमय

देवी सम्पद मण्डल रायगढ़ ईकाई द्वारा आयोजित ढिमरापुर स्थित दयाल वाटिका में हरिहरात्मक यज्ञ संत-सम्मेलन एवं श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ ब्रम्ह मुहुर्त में प्रात: परमपूज्य सद्गुरूदेव स्वामी शारदानंद सरस्वती महाराज द्वारा वेद मंत्रो के सस्वर पाठ सहित दिव्य रूद्राभिषेक किया गया। स्वामी सद्गुरूदेव श्री शारदानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन उद्बोधन में कहा कि भगवान ने हमें चौबिस घटें में 21 हजार छै: सौ सांसे दी है जो प्रतिदिन मनुष्य को दो घंटे भगवान का नाम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा देखा नही जा सकता सिर्फ अनुभव किया जा सकता है परमात्मा हर चीज में विद्यमान है वह दिखाई नही देता जिस तरह बिजली दिखाई नही देता परन्तू बिजली से पंखा, कूलर, मशीन कल कारखाने चलता है परन्तू बिजली बंद हो जाने से उससे चलने वाला सभी वस्तू बंद हो जाता है वह दिखाई नही देता सिर्फ उसे अनूभव किया जाता है उसी तरह हवा है तो सांसे है हवा देखा नही जा सकता उसे सिर्फ अनूभव किया जा सकता है। उसी तरह परमात्मा अनुभव किया जा सकता है देखा नही जा सकता।
संतश्री पं. कमलाकांत पांडेय ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि जीव परमात्मा का अंश है इसलिये जीव के अन्दर अपार शक्ति रहती है। अगर कमी रहती है तो केवल संकल्प की। संकल्प दृढ़ एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूर्ण करेंगे। अत: व्यक्ति को हमेशा सात्विक संकल्प करना चाहिये और संकल्प शक्ति दृढ़ होनी चाहिये। श्री रूकमणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तार से चर्चा करते हुए संतश्री ने कहा कि रूकमणी के भाई रूक्मि ने रूकमणी का विवाह शिशुपाल के साथ निश्चित किया था। लेकिन रूकमणी ने संकल्प लिया था कि मैं शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को ही पति रूप में वरण करूंगी। उन्होंने कहा शिशुपाल असत मार्गी है और द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत् मार्गी हैं, इसलिये मैं असत् को नहीं केवल सत्य को ही अपनाऊंगी। अत: प्रभु श्री द्वारिकाधीश जी ने रूकमणी के सत्संकल्प को पूर्ण किया। और उन्हें पत्नी रूप में वरणकर प्रधान पटरानी का स्थान दिया। श्री कृष्ण रूकमणी विवाह के पावन प्रसंग पर संतश्री ने श्रोताओं को बताया कि श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को अच्छे घर एवं वर की प्राप्ति होती है तथा दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है। कथा स्थल में उपस्थित श्रोतागण रूकमणी श्रीकृष्ण विवाह का उत्सव मनाने मंगल गान करते झुम-झुम कर नाचने लगे एवं फूलों की वर्षा कर भाव विभोर हो गए।

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *