सड़क दुर्घटना में साल भर में 167 लोगों की मौत
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जशपुरनगर। जिले में दुर्घटना के मामलों में आंशिक कमी जरूर हुई है, लेकिन पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो औसतन दुर्घटना में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। वर्ष 2018 में सड़क दुर्घटना के दौरान 167 मौत के मामले सामने आए हैं,जिसमें मौत का कारण दुर्घटना में चोट के साथ समय पर उचित गुणवत्तापूर्ण उपचार नहीं मिलना भी माना जाता है। जिला पुलिस इस वर्ष भी सड़क दुर्घटनाओं के मामले में परेशान रही है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े अध्ययनकर्ताओं सहित यातायात पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो जिले में दुर्घटना की स्थिति के साथ दुर्घटना के कारणों व प्रकृति पर भी प्रकाश डालते हैं। पिछले 5 वर्षो के आंकड़ो पर नजर डालें तो इस वर्ष जिले में सड़क दुर्घटना के मामले में थोड़ी कमी आई है। इस वर्ष हुए सडक दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण जिले की खस्ताहाल सड़क को माना जा रहा है। जहां पिछले वर्ष 2017 में जिले भर से 370 मामले सड़क दुर्घटना के सामने आए थे। जिसमें 1881 लोगों की मौत हुई थी और 376 लोग घायल हो गए थे। वहीं इस वर्ष यह 30 नवंबर तक आंकड़ा घटकर 268 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें 553 लोग घायल हो गए। वहीं 167 लोगों की मौत हुई है। वर्ष 2018 में औसत रूप से ऐसा दिन नहीं रहा, जिस दिन जिले में कहीं ना कहीं कोई ना कोई दुर्घटना घटित नहीं हुआ हो। कई बार एक दिन में दो से अधिक दुर्घटनाएं भी हुई है। वहीं पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2011 में सड़क दुर्घटना के 230 मामले सामने आए थे। वहीं वर्ष 2012 में 530 दुर्घटनाएं पुलिस में दर्ज किया गया था। वर्ष 2013 में 750 मामले आए। इसी तरह वर्ष 2015 में 427 मामले थे। वर्ष 2015 में सडक दुर्घटना में 122 लोगों की मौत हुई थी, वर्ष 2016 में सडक दुर्घटना में 141, 2017 में 188 लोगों की मौत हुई थी।

वही इस वर्ष 2018 में 30 नवंबर तक 167 लोगों की सडक दुर्घटना में मौत हुई है।
सड़क और शराब बड़ा कारण
जिले में हो रही दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण यहां की जर्जर सड़क और शराब की लत है। जिले में आवागमन का एकमात्र साधन सड़क मार्ग है। जिले की प्रमुख सड़क एनएच 43 है। इसके अलावा तपकरा, फरसाबहार, नारायणपुर व बगीचा क्षेत्र स्टेट हाइवे से जुड़े हैं। एनएच 43 की हालत इतनी खराब है कि सड़क पर चलना मुश्किल है। इस सड़क में सायकल से चलने वालों के साथ भी आए दिन दुर्घटना हो रही है। पिछले वर्षो का आकड़ा देखा जाए तो सबसे ज्यादा दुर्घटना स्टेट हाइवे में हुई है। उसके बाद एचएच और अन्य मार्गो में दुर्घटना घटित हुई है। स्टेट हाईवे में सड़क दुर्घटना के ग्राफ का बढने का मुख्य कारण खराब सडक और लोगों के द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाने को माना जा रहा है। प्राय: सभी त्यौहारों पर सड़क दुर्घटना में जब घायलों को उठाकर लाया जाता है, तो वे नशे में धुत होते हैं और इस स्थिति में इलाज करना भी मुश्किल होता है। बहुत कम दुर्घटना के मामले ऐसे होते हैं, जिनमें चालक व बैठे लोग शराब के नशे में न हो।

News Reporter

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