जांजगीर-चाम्पा जिले के चार विधानसभा में भीतरघातियों के कारण कांग्रेस को मिली हार
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दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के बूथों में पीछे रही कांग्रेस, जांच में मिलेंगे कई भीतरघाती

जांजगीर चाम्पा जिले के विधानसभा चुनाव में बागियों और भितरघातियों ने जांजगीर-चाम्पा जिले के चार सीट पर कांग्रेस की हार की कहानी लिखी। क्या असंतुष्ट कांग्रेस नेता कांग्रेस प्रत्याशी की जीत की राह में रोड़ा बने।
विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष को थामने में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई। इसका असर चुनाव परिणाम पर साफ दिखा बहुत कम मतो के अतंरो से हार का मुख देखना पडा़।
जबकि जांजगीर चाम्पा जिले के सभी विधानसभावो में निवास कांग्रेसी नेता जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर में प्रमुख पदों पर है। और बड़े नेता होने का दावा करते है। इसके बाद भी अपने निवास वार्ड से कांग्रेस को बढ़त नही दिला पाए।
इन सब प्रमुख नेताओं के बाद भी कांग्रेस इनके निवास बुथ लेवल में बढ़त नही बना सकी। जिससे इन नेताओं के जनाधार पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
जांजगीर चाम्पा जिले के चार विधानसभाओं मे कांग्रेस नेताओं के बीच तालमेल की कमी भी पराजय का एक कारण रहा। इनमें कई नेता टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन इनके नामो पर सहमती नही बनी और सिटिंग विधायक अकलतरा चुन्नीलाल साहू सिटिंग विधायक मोतीलाल जाजंगीर चाम्पा विधानसभा का नाम फाइनल हो गया। जिससे इन नेताओं के उम्मीदों पर पानी फिर गया। इसी कारण चुनाव के वक्त इनकी सक्रियता कम दिखी। जिसका परिणाम सबके सामने है उसी तरह पामगढ़ एवं जैजैपुर जनचर्चा के अनुसार लोगो ने बताया पिछले चार विस चुनावों में दो दो बार हार जीत का मुख देखना पडा है।
इसबार के चुनाव में कांग्रेस की दूसरी जीत पक्की लग रही थी। क्योंकि इसबार के चुनाव में भाजपा बिखर गई थी। भाजपा के कई नेता विभीषण बन गए थे। वही देखने को मिला जाजंगीर चाम्पा विधानसभा मे भाजपा नेता ब्यास कश्यप भी पार्टी छोड़ बसपा में शामिल हो चुनाव मैदान में उतर गए थे। जिससे भाजपा की जीत मुश्किल लग रही थी।
ऐसे में कांग्रेस का जीतना पक्का लग रहा था। लेकिन पार्टी से रुष्ट कांग्रेसी नेताओं ने कांग्रेस का नाव डूबा दिया।
क्या जांजगीर चाम्पा जिले के चार विधानसभाओ मे समीक्षा कर सीट के हार पर कांग्रेस पार्टी के आलाकमान चर्चा करेंगे या आने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए। भितरघातियों व विभीषणों को बख्श दिया जाएगा।
भितरघातियों पर होगी कार्रवाई या बख्शा जाएगा
विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोध में काम करने वाले रायगढ़ के दस दिग्गज कांग्रेस नेताओं को निलंबित किया गया। इन नेताओं में अधिक्तर टिकट की दौड़ में शामिल थे। जिनके द्वारा टिकट नही मिलने से विरोधी पक्ष में जाकर विभीषण का काम किया गया। चुनाव के बाद शिकायत के आधार पर कांग्रेस पार्टी ने इनको बाहर का रास्ता दिखाया। अगर कांग्रेस के शीर्ष नेता जांजगीर-चाम्पा जिले के विधानसभाओ में हार की तहतक जाएंगे। तो उन्हें भी कई भितरघाती मिलेंगे । जो पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल थे। अब देखना होगा क्या रायगढ़ की तरह जाजंगीर चाम्पा जिले में भी भितरघातियों व विभीषणों पर निलबंन की गाज गिरती है।

News Reporter

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