ग्रामीण और पाठ क्षेत्रों में गहराने लगी पेयजल समस्या
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सारे हालातों से वाकिफ होने के बावजूद प्रशासन नल जल योजना को लेकर नहीं है गंभीर, कई गावों में पेयजल के लिए ढोढ़ी ही एकमात्र सहारा
जिले के ग्रामीण और पाठ क्षेत्रों में पेयजल की समस्या आम बात हो गई है। जिले के कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसें हैं, जहां बारहों माह ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। वहीं कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां के ग्रामीण मात्र एक हैंडपंप के भरोसे ही वर्ष भर रहते हैं, या तो उन्हें पेयजल के लिए हैंडपंपों पर आश्रित रहना पड़ता है या फिर उन्हें ढ़ोड़ी के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जिले के बगीचा विकासखंड के पंडरापाठ ग्राम पंचायत का आश्रित गांव नावापारा के ग्रामीण प्रशासन की लापरवाही के कारण पेयजल की समस्या से दो चार हो रहे हैं। इस गांव में पेयजल के लिए शासन प्रशासन के की ओर से ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। इस गांव के ग्रामीणों के लिए मात्र एक हैंडपंप ही सहारा है और उसी हैंडपंप से गांव के सभी ग्रामीण पेयजल लेते हैं। जिले के पाठ क्षेत्रों में जल संकट सबसे गंभीर हैं यहां गर्मी के दस्तक के साथ ही जल स्त्रोतों के सूखने का सिलसिला शुरू हो जाता है। नदियों व तालाबों के सूखने के वजह से पशु पालको को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन सारे हालातों से वाकिफ होने के बावजूद प्रशासन नल जल योजना को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर प्रशासन ने पंड्रापाठ में 6 हैंडपंप लगा रखा है। जिसमें से गर्मी शुरू होते ही 3 हैंडपंप के हलक सूख जाते हैं। एक हजार से अधिक आबादी वाले पंड्रापाठ के ग्रामीण तीन हैंड पंप के सहारे ही पेयजल की व्यवस्था करते हैं। जिससे वहां के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
4 माह ही मिला नल जल योजना का लाभ : पंडरापाठ के ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के और नल जल योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रशासन के द्वारा लाखों की लागत से पानी टंकी का निर्माण वर्ष 2015 में कराया गया था। पानी का टंकी का निर्माण हो जाने के बाद 2 वर्ष तक यह पानी टंकी यहां के लिए शो पीस बनकर खड़ा था और इसका उपयोग नहीं हो पा रहा था। ग्रामीणों के द्वारा बार-बार मांग किए जाने के बाद विभाग के द्वारा पानी टंकी के निर्माण के दो वर्ष के बाद वर्ष 2017 में नल जल योजना को प्रारंभ करने के लिए बरसात के मौसम में यहां बोर खनन कर पानी टंकी को चालू कर दिया गया था। पानी टंकी के चालू हो जाने से यहां के ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल गई थी और उन्हें पेयजल के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा था, लेकिन यह मात्र 4 माह चलने के बाद जनवरी में इसका मोटर खराब हो जाने के कारण फिर से बंद हो गया है। 4 माह चलने के बाद फिर से नल जल योजना ठप्प हो जाने के कारण यहां के ग्रामीणों को फिर से पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है और उन्हें पेयजल के लिए हैडपम्प के ऊपर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। 4 माह चलने के बाद ठप्प हुए नल जल योजना को प्रारंभ करने के लिए ग्रामीणों के द्वारा कई बार गुहार लगाया गया है, लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण कोई ध्यान नहीं दिया गया।
एक हैंडपम्प से 3 सौ परिवार के लोग लेते हैं पानी : जिले के पंड्रापाठ के बगल में स्थित नवापारा गांव में लगभग 300 परिवार निवास करते हैंए और इन परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए गांव में 2 हैंडपम्प की स्थापना की गई है। वहीं कई लोग पेयजल की समस्या को देखते हुए अपने स्वंय के खर्च से अपने घरों में बोर खनन करवा चुके हैं। लेकिन जिनके घरों में बोर की सुविधा नहीं है वे आज भी गांव में विभाग के द्वारा स्थापित किए गए हैंडपम्प के भरोसे में ही है। पड्रापाठ के नवापारा बस्ती में विभाग के द्वारा 2 हैंडपम्प की स्थापना की गई है और इसी दो हैडपम्प के भरोसे में यहां के ग्रामीण रहते हैं, लेकिन पिछले तीन चार दिनों पहले ही यहां का एक हैंडपम्प जवाब दे दिया है। एक हैंडपम्प के खराब हो जाने के कारण अब यहां के ग्रामीणों को एक हैंडपम्प में ही लाईन लगा कर पानी भरना पड़ता है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें पेयजल के लिए सुबह 4 बजे से हैंडपम्प में लाईन लगानी पड़ती है।

News Reporter

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