भगवत कथा से भक्ति ज्ञान बैराग्य व त्याग मिलता है
Please Share the Post

भागवत् के 4 अक्षर से क्रमश: भक्ति ज्ञान बैराग्य व त्याग मिलने का तथ्य उजागर करते हुये पिछले कई दिनों से चल रहे भागवत् कथा दम्र्यान वेद व्यास आचार्य कृष्णा शास्त्री ने कही। इसी कडी में इन्हौंने कहा कि हमारे सनातन धर्म में चार तरह के पुरूषार्थ यथा: धर्म अर्थ काम मोक्ष से होकर गुजरना पडता है। धर्म का अर्थ है जो हमारे कार्य है वही धर्म है इस धर्म को ईश्वर का नाम लेते हुये उत्साह से निभाते हुये आगे बढना है ऐसे स्थिति में निसंदेह अर्थ का उपार्जन होता है और इस प्रकार अन्य दो पुरूषार्थ का निर्वाह स्वयमेव हो जाता है। एन केन प्रकारेण कमाये हुये धन से भागवत् कथा होना संभव नहीं है भागवत् कथा के लिये ईश्वर के प्रति जब तक समर्पण नहीं होगा तब तक इसका आयोजन नहीं हो पाता है।
बहुत सारे पैसे वाले भी इस तरह का आयोजन नहीं कर पाते ऐसा क्यो ? इसलिये कि पैसे से ही सब कुछ नहीं हो पाता जब तक कि ईश्वर के प्रति समर्पण नहीं होगा। ग्राम बुनगा में प्रदेश कांग्रेस सचिव आकाश मिश्रा व उसके परिवार जनों के द्वारा आयोजित भागवत् कथा में विगत दिनांक को भगवान् कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जिसमें आकाश मिश्रा एवं उनकी पत्नि ने नाटकीय भूमिका में भगवान् कृष्ण के माता पिता बने। समुचा बुनगा ग्राम को इसके लिये सजाया गया। महिलाएं कृष्ण के जन्म को लेकर बडे उत्साह के साथ मंगल गीत गाये और समुचा वातावरण उत्साह व उल्लास से भर गया है । ग्राम बुनगा भगवत् कथा के बदौलत इन दिनों लोग 12 बजे तक अपना रोजमर्रा का काम कर ले रहे हैं चूंकि 2 से 7 बजे तक भागवत कथा होता है।
आपसी मनमुटाव अथवा किसी को निचा दिखाने का नियत ग्राम बुनगा में बहरहाल देखने को नहीं मिल रहा है जो एक दूसरे का मुंह नहीं देखना नहीं चाहते थे भागवत् कथा के प्रेममय वातावरण में एक दूसरे को राधे कृष्ण अथवा राम राम कर अभिवादन कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि राजनीति के चलते ग्राम बुनगा में जो एक आपसी मनमुटाव होते हुये कई लोग एक दूसरे के साथ दूरी बना लिये थे वह दूरी अब कम होते नजर आ रही है इस तथ्य के मद्देनजर मिश्रा ने कहा कि भागवत् कथा के बदौलत ही यह संभव हो सका है।

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *