अवैध कब्जा को तोडऩे के स्थान पर बचाने में लगी पालिका सरकार
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बड़े चेहरे के अवैध कब्जाधारियो पर कार्यवाही नही

सारंगढ़ नगर पालिका की भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण से बड़े माफियाओ का मजा दो गुना हो गया है। बड़े चेहरो के द्वारा किया गया सरकारी जमीन पर अवैध बेजा कब्जा को बचाने के लिये नगर पालिका ऐसे बेजा कब्जा को अपने स्वामित्व मे लेने की बात कह रहा है वही छोटे और गरीबो के छोटे छोटे बेजाकब्जा दिखने पर उनको नोटिस देकर कार्यवाही का भय दिखाकर अवैध उगाही किया जाता है। ताजा मामला सारंगढ़ हस्पताल के सामने सरकारी भूमि पर किया गया दो मंजिला दुकान से संबंधित है जिसको तोडऩे के स्थान पर नगर पालिका उच्चाधिकारियो को गुमराह कर नगर पालिका के अधिपत्य मे लेने का प्रस्ताव पारित करन की जुगत में है। खास बात यह है कि अपने अधिपत्य मे लेने के बाद नगर पालिका अवैध बेजाकब्जाधारी को ही उक्त दुकान को सौपने की पीछे दरवाजे से डील फायनल कर चुका है।
अंधेर नगरी और चौपट अधिकारी वाले सारंगढ़ नगर पालिका मे अभी भी काले कारनामे मजबूती के साथ जारी है। प्रदेश में सरकार बदल गई किन्तु सर चढ़े हुए अधिकारियो का मनमानी थमने का नाम नही ले रही है। सरकारी भूमि खसरा नं. 1004/1 में लगभग 10 डिसमिल जमीन पर अवैध कब्जा करते हुए दो मंजिला दुकान और मकान तैयार हो गया और नगर पालिका को हवा तक नही लगा। और जब इस अवैध दुकान के बारे में नगर पालिका को शिकायत किया गया तो इस अवैध कब्जाधारी को सिर्फ नोटिस देकर ही कार्यवाही की इतिश्री कर दिया गया। अब नगर पालिका इस अवैध कब्जाधारी को बचाने के लिये बड़ा दांव खेलते हुए उच्चाधिकारियो के सामने प्रस्ताव रख दिया है कि इस अवैध रूप से बनाये गये अवैध निमार्ण को स्थानीय निकाय के द्वारा अपने अधिपत्य में लिया जाये और इसे अस्पताल को देकर इसे ब्लड बैंक के लिये दे दिया जाये तथा एक कक्ष को जनऔषधी केन्द्र के लिये दे दिया जाये। आखिर कौन से अधिनियम के तहत नगर पालिका के द्वारा इस अवैध निमार्ण को अभयदान देते हुए इसे नगर पालिका के अधिपत्य में लिया जा रहा है? तथा जिस जनऔषधी केन्द्र के संचालक पर अवैध कब्जा करने का आरोप है उसे ही एक कक्ष देकर सीधा सीधा उसका अवैध कब्जा और अवैध निमार्ण को बचाने का प्रयास किया जा रहा है? इस मामले मे सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका सारंगढ़ के एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा बेजा कब्जा कर निमार्ण करने वाले से मोटी रकम में डील फायनल हुई है जिसके तहत उक्त अवैध कब्जा को ढ़हाने के स्थान पर बचाने का काम शुरू हो गया है तथा बाद में इस अवैध भवन को उसी व्यक्ति को आबंटन कर दिया जायेगा जिसने बेजा कब्जा किया है। शासन और प्रशासन के नाक के नीचे सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करते हुए दो मंजिला मकान खड़ा कर दिया। निमार्ण के अवधी के दौरान नगर पालिका ने कभी इस बात की तस्दीक तक करने की जहमत नही उठाई कि जो निमार्ण हो रहा है वह सरकारी भूमि पर कौन करा रहा है। उसके बाद जब शिकायत हुई तब भी सिर्फ नोटिस तक दिया गया है। नगर पालिका का राजस्व अमला ने कभी इस अवैध निमार्ण पर कार्यवाही करने का हिम्मत और साहस भी नही किया क्योकि इस अवैध निमार्ण करने वाला शख्स बड़ा चेहरा है। वही गरीब व्यक्तियो के द्वारा छोटा सा भी अवैध निमार्ण कर दिया जाये तो उसको नोटिस के बाद कार्यवाही का भय दिखाकर रूपये उगाही का काम शुरू कर दिया जाता है।

अस्पताल की अचानक चिंता कैसे सताने लगी पालिका को?
पालिका सरकार के द्वारा उच्चधिकारियो को तर्क दिया गया है कि उक्त बेजा कब्जा सरकारी अस्पताल के सामने है इस लिये इस बेजा कब्जा को नही तोड़कर उसे नगर पालिका के द्वारा अपने अधिपत्य मे ले लिया जाये और एक कक्ष को ब्लड़ बैंक के लिये और एक कक्ष को जनऔषधि केन्द्र के लिये दे दिया जाये। किन्तु यहा पर यह नही बताया कि जिस जनऔषधी केन्द्र को एक कक्ष दिया जा रहा है उसी के संचालक ने यहा पर बेजा कब्जा किया है। अर्थात जिसने बेजा कब्जा किया है उसका बेजाकब्जा को बचाकर फिर से उसी व्यक्ति को आबंटन किया जा रहा है। वही ब्लड बैंक के लिये अलग से यहा फंड आ चुका है। विशेष बात यहा पर यह है कि आपरेशन थियेटर के लिये अस्पताल ने जो जमीन फायनल किया है उसे नगर पालिका के द्वारा गत एक वर्ष से आपत्ती लगाकर ओटी का निमार्ण शुरू नही करने दिया जा रहा है। जबकि 24 लाख रूपये की लागत से बनने वाले इस आपरेशन थियेटर के लिये फंड अस्पताल के पास आकर पड़ा है। ऐसे मे सिर्फ बेजा कब्जा बचाने के लिये है नगर पालिका अस्पताल का हितैषी बनने का नाटक कर रहा है।
गरीबो को नोटिस ऊपर नोटिस और अमीरो को संरक्षण?
पालिका सरकार के द्वारा बेजा कब्जा के मामले मे दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। यहा पर गरीबो के बेजा कब्जा पर उनको नोटिस ऊपर नोटिस दिया जा रहा है और उगाही का साधन नोटिस को बना दिया गया है। वही अमीरो के बेजाकब्जा को बचाने के लिये उसको नगर पालिका के अधिपत्य मे लेने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह दोहरा और मनमानी रवैया सिर्फ बड़े स्तर पर बेजा कब्जा को बचाने के लिये किया गया लेनदेन को ही असर है जिसके कारण से जिम्मेदार अधिकारी बेजा कब्जा को हटाने की कार्यवाही के स्थान पर उसे नगर पालिका के अधिपत्य मे लेने का प्रस्ताव बड़े अधिकारी के सामने रख कर गुमराह कर रहे है। आखिर किस नियम के तहत बेजा कब्जा को पालिका सरकार अपने अधिपत्य मे लेगी? और जब लेना है तो पालिका क्षेत्र के बने सभी अवैध कब्जा को अधिपत्य मे लेकर सभी पर अपना कब्जा नगर पालिका को करना चाहिये। किन्तु यहा पर अंधेर नगरी और चौपट अधिकारी पदस्थ है जो यहा चेहरा देखकर तिलक लगा रहे है।

News Reporter

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