इंड्स एनर्जी की जुबान बोल रहे जल संसाधन विभाग के अधिकारी
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1 साल से भी ज्यादा समय से अवैध तरीके से जल दोहन का मामला

रायगढ़ जिले के महापल्ली के समीप स्थित इंड्स एनर्जी नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए काम कर रहा है । और जल संसाधन विभाग के अधिकारी कंपनी प्रबंधन की जुबान बोलते नजर आ रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं इंड्स एनर्जी की ओर से पिछले 1 साल से भी ज्यादा समय से सपनाई नाले का जल अवैध तरीके से दोहन का। हम आपको बता दें कि इंड्स एनर्जी पिछले 1 साल से भी ज्यादा समय से नाले का जल अवैध रूप से अपने उपयोग के लिए ले रहा है फिर भी जल संसाधन विभाग के अधिकारी कंपनी प्रबंधन की भाषा बोल रहे हैं । उनका कहना है कि आप शपथ पत्र देकर शिकायत करें तो जांच की जाएगी।
शपथ पत्र की बात क्यों कर रहे अधिकारी
जिस उद्योग की ओर से पहले से ही पानी का उपयोग करने के एवज में करोड़ों रुपए बकाया हो और उनका भुगतान न कर रहा हो ऐसे उद्योग द्वारा अनियमितता बरतने कि जब शिकायत विभाग के पास होती है तो अधिकारी शिकायत कर्ताओं से शपथ पत्र मांगते हैं ऐसा केवल इसलिए ही हो सकता है या तो अधिकारी उद्योग प्रबंधन के एहसानों तले दबे हुए या फिर उनके रसूख से खौफ जदा है।
पंप ऑपरेटर ने बताई हकीकत
एक और एंड्स एनर्जी के लिए जिस नाले से पानी लिया जा रहा है उस नाले पर स्थित पंप के ऑपरेटर ने यह बताया कि लगभग 1 साल से यहां से इंस एनर्जी उद्योग के लिए पानी यहां से पंप के माध्यम से लिया जा रहा है और पंप को 2 शिफ्ट में ऑपरेट किया जाता है।
विभाग और कंपनी प्रबंधन के अधिकारियों का झूठ
इस उद्योग की ओर से पानी लेने की हकीकत में केवल पंप ऑपरेटर बल्कि ग्रामीण भी बयां कर रहे हैं । तो वहीं दूसरी ओर उद्योग प्रबंधन के अधिकारी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी दोनों ही सुर में सुर मिला कर बात कर रहें है इनका कहना है कि हाल ही में कोर्ट के आदेश पर उद्योग की ओर से पानी लिया जा रहा है । जबकि पिछले 1 साल से उद्योग प्रबंधन उस जल का उपयोग नहीं कर रहा है।
कोर्ट ने 3 गुना रेट पर दी है पानी की अनुमति
इंड्स एनर्जी और संबंधित विभाग के अधिकारियों की माने तो न्यायालय की ओर से इंस एनर्जी को पानी के मामले में राहत देते हुए 3 गुना टैक्स अदा करने की शर्त पर उद्योग के लिए पानी लेने की बात कही है। मतलब यह कि जब उद्योग नाले से पानी लेगा तो वह जल संसाधन विभाग की ओर से निर्धारित रेट से 3 गुना ज्यादा रेट के अनुसार संबंधित विभाग को भुगतान करेगा। लेकिन यह आदेश हाल ही में आया है जबकि उद्योग को नए सिरे से जब ने प्रबंधन ने चालू किया है तो उसे चालू हुए लगभग 1 साल हो गए हैं ऐसे में उद्योग प्रबंधन की ओर से भी नाले के पानी का ही उपयोग किया जा रहा था इस दौरान जल का अवैध दोहन करने पर विभाग मौन है। और उसे शिकायत के साथ शपथ पत्र का इंतजार है।

News Reporter

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