थानेदार से लेकर पीएमओ तक की शिकायत फिर भी दर्ज नहीं हो सका एफआईआर- सीए सुनील
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मैंने पिछले कई महीनों से अपने ऊपर हो रहे अत्याचार एवं ब्लैक मेलिंग की शिकायत कोतवाली थाना सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों एवं पीएमओ तक की है बावजूद इसके अब तक आरोपी पर मामला पंजीबद्ध नहीं किया गया है जबकि दूसरी ओर आरोपी ने झूठे आरोपों को आधार बनाकर कोतवाली में मेरे खिलाफ एफआईआर कर दिया है। यह कहना है रायगढ़ के कोतरा रोड निवासी सीए सुनील का। उन्होंने बताया कि मृदुबाला राय नामक एक महिला ने कोतवाली थाना में एक शिकायत दर्ज करवाई कि सीए सुनील अग्रवाल ने उन्हें स्टैंड अप योजना के तहत लोन दिलवाने और सब्सिडी के 5 लाख दिलवाने के लिए केस अपने हाथ में लिया। उसने 35 लाख का लोन तो बैंक ऑफ बड़ौदा से दिलवा दिया लेकिन उसे 5 लाख की जो सब्सिडी मिलनी थी उसे नहीं दिलवा पाया। सीए का कहना था कि उन्हें जो दस्तावेज दिया गया उससे संबंधित विभाग संतुष्ट नहीं था इसलिए सब्सिडी देने से उसने इनकार कर दिया।
2018 में मृदुबाला राय नामक महिला को अपना व्यवसाय करने के लिए लोन की आवश्यकता थी उन्होंने सीए सुनील अग्रवाल से संपर्क किया उन्होंने उनसे कुछ दस्तावेज मंगवाए और काम शुरू करने के लिए एक गोडाउन अपने किसी अन्य क्लाइंट से कहकर दिलवा दिया। दस्तावेजों के आधार पर महिला का 35 लाख का लोन तो निकल गया लेकिन गोडाउन चूंकि एक आदिवासी के नाम था इसलिए संबंधित विभाग ने सब्सिडी देने से इंकार कर दिया। इसपर महिला ने इस मामले की शिकायत पुलिस में कर दी।
आरटीआई से मिले सबूत
सीए और महिला के बीच विवाद बढ़ गया तो सीए ने भी उनके दस्तावेजों की छानबीन करवाई और ये दस्तावेज उसने पुलिस की फाइल से ही सूचना अधिकार में निकाले। इसके तह में जाने पर पता चला कि महिला ने नगर निगम क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए लोन हेतु बैंक में ग्राम सरपंच का एन ओ सी लगाया है और वह 2 पैन कार्ड रखे हुए है और दोनों में ही रिटर्न भरती है जिससे यह युक्तियुक्त आशंका है कि उसने पहले भी झांसा देकर किसी बैंक को चूना लगाया होगा।यहां गौर तलब है कि नया 35 लाख का लोन एन पी ए हो चुका है।पर बैंक भी चुप है और अपने मुख्यालय के आदेश का इंतज़ार कर रही है। ऐसे में महिला पर नकली दस्तावेज रखने, उसके आधार पर लोन लेने, सरकारी धन को गलत तरीके से इस्तेमाल का आरोप और इसकी शिकायत पीएमओ तक होने पर पीएमओ ने इस मामले में पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए जिसपर अभी तक एफआईआर नहीं हुई है। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्रालय के आदेश को भी दरकिनार कर दिया गया है। अब सवाल यह है कि पुलिस जिस मामले में लोगों को टरका देती है ऐसे मामले पर पुलिस ने मामला दर्ज तो कर लिया लेकिन दूसरी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की।
ठोक दिया धारा 420
अमूमन पुलिस, जो कई मामले को हस्तक्षेप अयोग्य मानकर 155 की पर्ची थमा देती है ने इस मामले में सीए के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत पंजीबद्ध कर लिया। लेकिन सवाल यह है कि सेवा में कमी या लापरवाही का मामला पुलिस ने बिना यह जाने की उनके परिधि में है या नही मामला पंजीबद्ध कैसे कर लिया। जानकारों के मुताबिक यह मामला उपभोक्ता फोरम के योग्य है।

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