सिवनी-नैला में आयोजित भागवत कथा में उमड़ी भक्तों की भीड़
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गौरव ग्राम सिवनी-नैला में ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के सातवें दिन व्यास पीठ से दीपक महाराज ने कहा कि भगवान की 16 हजार 108 शादियां केवल लौकिक नहीं थी, वेद शास्त्रों की ऋचाएं थी।
आचार्य ने कहा कि समरा सुर काम का प्रतीक था। जिसे साक्षात कामदेव ने भगवान कृष्ण के बेटे बनकर उसका संहार किया था। उन्होंने आगे कथा सुनाते हुए कहा कि पांडवों के राजसूर्य यज्ञ में शामिल होकर भगवान कृष्ण शिशुपाल का वध किया, जो अहंकार का रूप था। बाद में सुदामा ब्राह्मण का कथा सुनाते हुए आचार्य ने बताया सुदामा गरीब थे, लेकिन वह दरिद्र नहीं थे। दरिद्र वह होता है जो लाखों की संपत्ति रखें लेकिन मन से वह कपट करे। जो उदार न रहे, वह दरिद्र कहलाता है। इस तरह भगवान कृष्ण त्रिलोक पति होते हुए भी गरीबों का भी उतना ही ख्याल रखते है। आचार्य ने कहा कि भगवान कृष्ण ने अमीर एवं गरीबों की खाई को बराबर करने का प्रयास किया। उन्होंने अपनी द्वारिका लीला में वैराग्य को स्थापित कर अपने धाम चले गए। इस कथा को सुनने के लिए आसपास के श्रोताओं का तांता लगा रहा है। आचार्य अमित मिश्रा ने ग्रामीणों का आभार जताते हुए कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर की।

News Reporter

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