रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक बाजार पर मंडराए काले बादल, ये होगा भारत को नुकसान

width=1600 नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक बाजार सबसे अधिक प्रभावित होने वाला है। इस संकट के चलते वैश्विक बाजार पर खतरे के काले बादल मंडरा रहे हैं। दुनियाभर के देश और केंद्रीय बैंक कोविड-19 महामारी के प्रकोप से धीरे-धीरे बाहर निकले हैं। अर्थव्यवस्थाओं में रिकवरी आई है और अब यूक्रेन संकट ने फिर से सभी को बड़ी टेंशन दे दी है। इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजार पर बड़ी तेजी से देखने को मिलेगा। जानी-मानी वित्तीय एवं रिसर्च कंपनी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन संकट के चलते एशिया में सबसे बड़ा असर भारत में देखने को मिल सकता है। क्रूड ऑयल की आसमान छूती कीमतों का असर हमें सबसे अधिक प्रभावित कर सकता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 फीसद उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुकी है। रिसर्च फर्म की रिपोर्ट के अनुसार, क्रूड ऑयल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर काफी बुरा असर डालेंगी। बढ़ती महंगाई, कमजोर चालू खाता, बढ़ता घाटा और आर्थिक ग्रोथ के प्रभावित रहने से मुश्किल और बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया कि इस स्थिति में भारत, थाइलैंड और फिलीपींस को सबसे अधिक नुकसान होगा। जबकि, इंडोनेशिया को अपेक्षाकृत रूप से फायदा होगा। शुद्ध रूप से तेल आयातक होने के चलते भारत को भारत को भी काफी नुकसान होगा, क्योंकि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट मे कहा गया, 'कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से उपभोक्ताओं और कारोबारों पर काफी बुरा प्रभाव पडे़गा। हमारा अनुमान है कि तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 फीसद उछाल के कारण जीडीपी ग्रोथ में करीब 0.20 पर्संटेज प्वाइंट की गिरावट आएगी। एक रिसर्च के अनुसार, भारत के क्रूड बास्केट में 10 डालर प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी वित्त वर्ष 2022 के लिए वार्षिक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान 9.2 फीसद से 10 आधार अंक की ग्रोथ कम कर सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि क्रूड बास्केट में 10 फीसद की स्थायी बढ़त डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई में 1.2 फीसद और आधारित आधारित महंगाई में 0.3 से 0.4 फीसद की बढोत्तरी कर सकती है। एजेंसी ने कहा कि हाल ही में मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि वित्त वर्ष 2023 में मुद्रास्फीति के 4.5 फीसद रहने का अनुमान है। लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव की अनुपस्थिति में आरबीआई ने आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के ऊपर जाने के जोखिम को महसूस नहीं किया। अब आरबीआई को महंगाई को काबू करने के लिए कुछ बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।