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चमोली में बर्फ से घिरे पहाड़ की चोटी पर फहराया तिरंगा,जगदलपुर की 14 सदस्यीय टीम पहुंची उत्तराखंड, 7 डिग्री तापमान और 15000 फीट की ऊंचाई, मुख्‍यमंत्री विष्‍णुदेव ने दी बधाई

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Tricolor hoisted on top of snow surrounded mountain in Chamoli, 14 member team of Jagdalpur reached Uttarakhand, 7 degree temperature and altitude of 15000 feet, Chief Minister Vishnudev congratulated.

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के जगदलपुर निवासी किशोर पारेख ने अपना नाम इतिहास में दर्ज कर लिया है। पारेख उत्‍तराखंड की पांगरचुल्‍ला की चोटी पर तिरंगा लहराया है। चोटी तक पहुंचने के लिए उन्‍हें 15 हजार फीट की ऊंचाई पर चढ़ना पड़ा, जहां तापमान सामान्‍य से 7 डिग्री सेल्सियस नीचे था। मुख्‍यमंत्री विष्‍णुदेव साय ने पारेख को बधाई दी है। अपने एक्‍स पोस्‍ट में सीएम साय ने लिखा है कि “लहरा दो सरकशी का परचम लहरा दो” हमारे छत्तीसगढ़ के जगदलपुर शहर के किशोर पारेख जी ने माइनस 7 डिग्री में 15 हजार फीट ऊंची उत्तराखंड की पांगरचुल्ला चोटी में तिरंगा लहराकर एक नया कीर्तिमान रचा है। उम्र को बाधा न मानकर किशोर जी के इस जज्बे से पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है। उनको बहुत-बहुत बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।

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कौन हैं किशोर पारख

पांगरचुल्‍ला की चोटी पर तिरंगा लहराने वाले किशोर पारख बस्‍तर के चेंबर ऑफ कामर्स के पूर्व अध्‍यक्ष हैं। किशोर के साथ 14 अन्‍य लोग भी पांगरचुल्‍ला की चोटी पर तिरंगा लेकर गए थे। चोटी पर चढ़ाई 5 और 6 मई की रात को शुरू की। करीब 8 घंटे की चढ़ाई के बाद वे लोग पांगरचुल्‍ला की चोटी पर पहुंचे। किशोर के साथ पांगरचुल्‍ला की चोटी पर पहुंचने वाले अन्‍य लोगों में कर्नाटक के लोग शामिल थे।

उन्होंने बताया कि 5-6 मई की रात करीब एक बजे उन्होंने चोटी पर चढ़ना शुरू किया। बेस कैंप से लगभग छह किमी की ऊंची चढ़ाई कर बर्फ से घिरे कई पर्वतों को पार कर दल सुबह लगभग आठ बजे पांगर्चुल्ला पहुंचा। तापमान -7 डिग्री था, लेकिन तेज ठंडी हवाओं के कारण -10 डिग्री का अनुभव दिला रहा था। इस अभियान में युवा, बुजुर्ग व महिलाएं भी शामिल थी। सभी ने पूरे जोश,उत्साह के साथ अपने इस मुश्किल अभियान को सफल बनाया।

उन्होंने आगे कहा कि अभियान के सदस्यों को मौसम की मार भी झेलनी पड़ी। खराब मौसम और बारिश के कारण इस अभियान को एक दिन के लिए टालना भी पड़ा था। अभियान के सदस्यों ने पहले दिन दुगासी से चढ़ाई शुरू की गई। गुलिंग पहुंचकर दल ने वही रात्रि विश्राम किया। अगले दिन गुलिंग से खुल्लारा तक की चढ़ाई गई। यह मार्ग घने जंगलों के बीच से दुर्गम चढ़ाई का था। अंततः छठे दिन दल ने अपना लक्ष्य हासिल किया और 15 हजार फिट से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित पांगर्चुल्ला पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की।

किशोर पारेख ने इस अभियान को बेहद रोमांचक और यादगार बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति लगाव होने के कारण पिछले काकी समय से उनके मन में हिमालय की किसी चोटी पर ट्रेकिंग करने की इच्छा थी, जो अब पूरी हुई। पर्वतारोही नैना सिंह धाकड़ और मित्र डीएस सोलंकी दोनों ने मुझे इस अभियान के लिए काफी प्रभावित किया। पारेख का कहना था कि यदि हौसला हो तो उम्र बाधा नहीं हो सकती। जज्बा हो तो पहाड़ भी लांघा जा सकता हैं। उम्र के एक पड़ाव के बाद जब लोग घर परिवार में व्यस्त हो जाते हैं या बीमारी से घिर जाते हैं। उस उम्र में भी स्वस्थ शरीर हो तो माइनस डिग्री में भी चढ़ाई हो सकती हैं, मैंने वही प्रयास कर सफलता पाई है।

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