विकास दिव्यकीर्ति, जो लोकप्रिय UPSC कोचिंग संस्थान दृष्टि IAS के संस्थापक हैं, एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। यह विवाद उनके एक पुराने वायरल वीडियो को लेकर है, जिसमें उन्होंने “IAS बनाम जज – कौन ज़्यादा ताकतवर?” विषय पर न्यायपालिका से संबंधित कुछ आपतिजनक टिप्पणियाँ की थीं। राजस्थान के अजमेर में दर्ज मानहानि याचिका पर सुनवाई के बाद, अदालत ने उन्हें 22 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर विवाद
विवाद का केंद्र एक यूट्यूब वीडियो है जिसका शीर्षक ‘IAS vs Judge कौन ज्यादा ताकतवर है Best Guidance by Vikas Divyakirti sir hindi motivation’ है। शिकायतकर्ता कमलेश मंडोलिया ने दावा किया है कि इस वीडियो में IAS अधिकारियों और जजों के लिए अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं, जो न्यायपालिका की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं और कानून से जुड़े पेशेवरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाती हैं।
अजमेर के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश और न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन चंदेल ने 8 जुलाई को अपने आदेश में कहा कि “वीडियो में न्यायपालिका का उपहास उड़ाया गया है। इससे न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।” कोर्ट ने इस मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 (1), (2), (3), (4) के तहत आपराधिक रजिस्टर में दर्ज करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट का सख्त रुख और दिव्यकीर्ति का बचाव
अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा “अपमानजनक, आपत्तिजनक और नीचा दिखाने वाली” थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सीमित होता है और इसका इस्तेमाल न्यायपालिका का अपमान करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अरुंधति रॉय (2002) और प्रशांत भूषण (2020) मामलों का भी हवाला दिया, यह दर्शाने के लिए कि इस तरह की टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं।
वहीं, विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी सफाई में कहा कि विवादित वीडियो से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो किसी थर्ड पार्टी ने उनकी अनुमति के बिना संपादित कर अपलोड किया था। उनका तर्क था कि न तो दृष्टि IAS ने इसे प्रकाशित किया और न ही उन्होंने इसकी अनुमति दी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता को BNS की धारा 356 के तहत ‘पीड़ित व्यक्ति’ नहीं माना जा सकता, क्योंकि वीडियो में किसी व्यक्ति या समूह का नाम नहीं लिया गया। हालांकि, अदालत ने उनके इन तर्कों को खारिज कर दिया।
अगली सुनवाई और व्यापक बहस
अदालत ने दिव्यकीर्ति के थर्ड पार्टी वाले तर्क को भी अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एक शिक्षक और संस्था के निदेशक के रूप में, उन्हें इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उनका भाषण रिकॉर्ड किया जा रहा है और यह सार्वजनिक हो सकता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दिव्यकीर्ति ने वीडियो अपलोड करने वाले को कोई नोटिस नहीं भेजा और न ही इस पर आपत्ति दर्ज की।
इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2025 को होगी, जहाँ विकास दिव्यकीर्ति को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जहाँ न्यायपालिका की गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। यह मामला न केवल विकास दिव्यकीर्ति और दृष्टि IAS के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करने की जिम्मेदारी पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
कौन हैं डॉ. विकास दिव्यकीर्ति?
- जन्म: 26 दिसंबर 1973, हरियाणा
- UPSC: 1996 में 384वीं रैंक के साथ UPSC क्लियर किया।
- सरकारी सेवा: गृह मंत्रालय में चयनित होने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा छोड़ दी।
- दृष्टि IAS: 1 नवंबर 1999 को Drishti IAS की स्थापना की।
- सोशल मीडिया: उनके यूट्यूब चैनल के करोड़ों फॉलोअर्स हैं।
- परिवार: उनकी पत्नी डॉ. तरुणा वर्मा और पुत्र सत्विक दिव्यकीर्ति हैं।



