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वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे पर सांदीपनी कॉलेज ऑफ फार्मेसी में रक्तदान शिविर — जीवनदान की मिसाल, 68 यूनिट रक्त संग्रहित

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Blood donation camp at Sandipani College of Pharmacy on World Pharmacist Day – An example of life-saving, 68 units of blood collected

मस्तूरी।मानवता की सेवा के भाव को साकार करते हुए सांदीपनी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, पेंड्री मस्तूरी, बिलासपुर के आँगन में आज एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। वर्ल्ड फार्मासिस्ट डे के उपलक्ष्य में आयोजित रक्तदान शिविर में छात्र, प्राध्यापक और कर्मचारी एकजुट होकर जीवनदान के महायज्ञ में सहभागी बने।

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इस वर्ष की थीम “रक्त दें, आशा दें: साथ मिलकर हम जीवन बचाते हैं” की पंक्तियाँ मानो सजीव हो उठीं। युवा रक्तदाताओं की मुस्कान में आशा की किरण झलक रही थी, तो उनके संकल्प में किसी अनजान जरूरतमंद के जीवन को बचाने की पवित्र भावना बसी थी।

शिविर का संचालन सिम्स हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा किया गया। उन्होंने रक्तदान को केवल सेवा ही नहीं, बल्कि स्वयं के स्वास्थ्य और समाज दोनों के लिए वरदान बताया। उनके प्रेरक शब्दों ने युवाओं को जीवनभर रक्तदान की परंपरा से जुड़ने का संकल्प दिलाया।

संस्थान के डायरेक्टर श्री महेंद्र चौबे एवं प्रशासनिक अधिकारी श्री विनीत चौबे के मार्गदर्शन में यह आयोजन एक सामाजिक उत्सव में बदल गया। फार्मेसी प्रभारी श्री सुनील प्रजापति, सहायक प्राध्यापक वंदना निराला, दुर्गा प्रसाद पटेल,रुचि मिश्रा, अभिषेक सोनवानी, शिवानी सोनी, पवन बारगाह एवं नर्सिंग प्रिंसिपल डॉ. पी. महेंद्रवर्मन, वाइस प्रिंसिपल श्रीमती आर. सेंखाथिर सेल्वी, की उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

संस्थान के डायरेक्टर ने अपने उद्बोधन में कहा—
“रक्तदान ही सच्चा महादान है। यह मानवता की सबसे सरल परंतु सबसे महान सेवा है, जो किसी अनजान की धड़कनों को नया जीवन दे सकती है।”
उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि संस्थान भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर करता रहेगा और सेवा की यह धारा कभी थमेगी नहीं।

फार्मेसी, नर्सिंग, शिक्षा विभाग, यूजी और आईटीआई के विद्यार्थियों सहित सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों ने पूरे उत्साह और जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभाई।

उल्लेखनीय उपलब्धि: इस शिविर में 68 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया, जो न केवल एक आँकड़ा है, बल्कि सैकड़ों धड़कनों में जीवन का संचार करने वाली अमूल्य पूँजी है। यह उपलब्धि बिलासपुर क्षेत्र में सामाजिक सेवा का एक सुनहरा अध्याय जोड़ती है।

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