There was a reward of Rs 23 lakh on four Maoist cadres who returned to the mainstream.
जिला कांकेर,10/12/2025
“पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन”
🔳 “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” — बदलाव की नई शुरूआत l
🔳 क्रूर और जनविरोधी माओवादी विचारधारा का खात्मा, शांति की स्थापना l
🔳पुनर्वास में शामिल होने वालों में उत्तर बस्तर डिवीजन, DK टेक्निकल टीम,गढ़चिरौली डिवीजन के माओवादी है।
🔳 राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति, तथा शांति,संवाद एवं विकास पर आधारित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप आज 04 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। जिसमें 23 लाख के 02 महिला कैडर और 02 पुरुष कैडर शामिल हैं, जिन्होंने सशस्त्र और हिंसक विचारधारा से स्वयं को अलग कर शांति और प्रगति के मार्ग को अपनाया है ।
🔳 इन 04 कैडरों में कंपनी नम्बर 10 की- 01 सदस्या,एसीएम-02 एवं पीपीसीएम-01शामिल हैं, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है।
🔳 श्री सुन्दरराज पी०( भा०पु०से०) पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज,श्री अमित तुकाराम कांबले (भा०पु०से०) उप पुलिस महानिरीक्षक कांकेर रेंज,के मार्ग दर्शन,श्री आई० के० एलिसेला(भा०पु०से०) उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांकेर,श्री विपुल मोहन बाला उप महानिरीक्षक बीएसएफ भानुप्रतापपुर सेक्टर के निर्देशन में जिले में चलाये जा रहे माओवादी उन्मूलन अभियान के तहत एवं छ०ग० शासन की पुनर्वास आत्मसर्पण नीति साथ ही छ०ग० शासन द्वारा चलाये जा रहे नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित होकर श्री आई० के० एलिसेला (भा०पु०से०) उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांकेर, श्री आकाश श्री श्रीमाल (भा०पु०से०),अति0 पुलिस अधीक्षक भानुप्रतापपुर, श्री दिनेश कुमार सिन्हा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कांकेर, श्री मनोज कसाना 2IC BSF 94 B.N.बांदे,श्री हरिप्रकाश 2IC BSF 40 B.N.,श्री गिरिजाशंकर साव उप पुलिस अधीक्षक ऑप्स कांकेर,श्री अविनाश ठाकुर उप पुलिस अधीक्षक डीआरजी कांकेर,सुश्री विंकेश्वरी पिंदे उप पुलिस अधीक्षक मुख्यालय कांकेर के समक्ष आज दिनांक 10/12/2025 को आत्मसमर्पण किये ।
⏩आत्मसमर्पित मओवादियो की संक्षिप्त जानकारी:-
⏩(01) काजल उर्फ रजीता वेड़दा
पदनाम- कंपनी न०10 सदस्या
ईनाम-08.00 लाख रूपये
⏩ वर्ष 2021 नक्सल संगठन मे भर्ती
⏩ माह नवंबर 2024 ग्राम मुसफरसी पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की घटना 05 नक्सल मारे गये में शामिल।
⏩ (02) मंजूला उर्फ लक्ष्मी पोटाई
पदनाम-उत्तर बस्तर डिवीजन टेक्निकल टीम सदस्या एसीएम ईनाम-05.00 लाख रूपये
⏩ वर्ष 2005 मे नक्सल संगठन में भर्ती
⏩ वर्ष 2006 से 2025 के मध्य 16 से अधिक नक्सल घटनाओ मे शामिल।
⏩वर्ष 2008 ग्राम महामाया व दल्ली के मध्य आईईडी विस्फोट की घटना 03 जवान शहीद।
⏩ वर्ष 2009 ग्राम कोरकोटी पुलिस-नक्सली मुठभेड़ एवं एम्बुश की घटना पुलिस अधीक्षक सहित 29 जवान शहीद।
⏩(03)विलास उर्फ चैतु उसेण्ड़ी
पदनाम-D.K.टेक्निकल प्लाटून नंबर 50 सदस्य पीपीसीएम
ईनाम-05.00 लाख रूपये
⏩ वर्ष 1995 मे नक्सल संगठन मे भर्ती
⏩ वर्ष 2007 साधुमिचगांव मोड़ एम्बुश एवं आईईडी विस्फोट की घटना 05 जवान शहीद।
⏩ माह मार्च 2025 ग्राम पोदेबेड़ा एवं बीनागुण्ड़ा के मध्य पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की घटना।
⏩ (04) रामसाय उर्फ लखन मर्रापी
पदनाम- बड़गांव एलओएस उप कमांडर एसीएम
ईनाम-05.00 लाख रूपये
⏩ वर्ष 2004 मे नक्सल संगठन मे भर्ती
⏩ वर्ष 2004 से 2025 के मध्य 42 से अधिक नक्सल घटनाओ मे शामिल।
⏩ वर्ष 2008 ग्राम गुमड़ीडीह एवं कोण्डे के मध्य एम्बुश की घटना 06 जवान शहीद।
⏩ वर्ष 2010 ग्राम भुस्की मोड़ एम्बुश की घटना 05 जवान शहीद।
⏩ वर्ष 2019 ग्राम महला एम्बुश की घटना 04 जवान शहीद।
⏩ वर्ष 2024 ग्राम हिदूर पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की घटना 01नक्सल मारा गया एवं 01जवान शहीद।
🔳 इन 04 कैडरों के समाज में पुनर्वास और पुनर्समावेशन के लिए आवश्यक विधिक प्रक्रिया जारी है ।
🔳 राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने दक्षिण बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव स्थापित की है। पुलिस, सुरक्षा बलों,स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के जागरूक नागरिकों के सामूहिक एवं समन्वित प्रयासों से हिंसा और भय की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में बदलने में बड़ी सफलता मिली है।
🔳 मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी कैडरों ने भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन जीने का संकल्प लिया है। पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कैडर को प्रोत्साहन स्वरूप 50,000 रुपये की तत्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
🔳 श्री आई०के० एलिसेला (भा०पु०से०)उप महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांकेर ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि-
“छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है । आत्मसमर्पण करने वालों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जियें और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें।”
उन्होंने आगे कहा कि—
“माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें। शासन की ‘पूना मारगेम’ नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान कर रही है।”



