मस्तूरी।
पी. एम. श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय मल्हार, बिलासपुर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अरुण त्रिपाठी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र प्रमुख, बिलासपुर के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। तदोपरांत विद्यालय के प्राचार्य श्री एम. के. श्रीवास्तव के द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। तत्पश्चात छात्र छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। स्वागत भाषण विद्यालय के वरिष्ठ स्नातकोत्तर शिक्षक (भौतिकशास्त्र) श्री एन. पी. नामदेव के द्वारा दिया गया। उन्होंने रमन प्रभाव की जानकारी देते हुए कहा कि जिज्ञासा मनुष्य होने का एहसाह कराती है। तदोपरांत कक्षा ग्यारहवीं के छात्र स्वयं गुप्ता तथा कक्षा आठवीं की छात्रा ऋचा गुप्ता ने डॉ. सी. वी. रमन का संक्षिप्त जीवन परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विज्ञान का थीम है- ‘विकसित भारत के लिए स्वदेश तकनीक ।
तत्पश्चात प्राचार्य श्री एम. के. श्रीवास्तव ने रमन प्रभाव की सरल व्याख्या करते हुए कहा कि बच्चे मूलतः जिज्ञासु व वैज्ञानिक प्रवृति के होते हैं, परंतु जैसे-जैसे वह बड़े होते जाते हैं, उनकी वैज्ञानिक प्रवृत्ति खत्म होती चली जाती है; आज का दिन वैज्ञानिक सोच व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का दिन है।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं द्वारा विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसका बारीकी से अवलोकन मुख्य अतिथि डॉ. अरुण त्रिपाठी द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में कक्षा ग्यारहवीं के छात्र जोगेंद्र द्वारा हाउस क्लीनिंग यंत्र, ग्यारहवीं की छात्रा समृद्धि द्वारा स्ट्रीट लाइट, नीरज तथा एवेंजल के द्वारा
ओबस्टेकल सेंसर, दिवांशु द्वारा एल्कोहल डिटेक्टर, कक्षा छठवीं सातवीं व आठवीं के विद्यार्थियों द्वारा डेफयार्ड, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, सोलर एनर्जी में इलेक्ट्रिक एनर्जी में रूपांतरण वाले यंत्र, वोल्कोनिक, केलीडोज, थर्मल पॉवर प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, वायु प्रदूषण मापी यंत्र, हाइड्रो इलेक्ट्रिकसीटी जेनरेटर, ज्वालामुखी विस्फोट जैसे लगभग इक्कीस मॉडलों का प्रदर्शन किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. त्रिपाठी ने इस दरमयान मॉडल में प्रयुक्त किसान व मॉडल की उपयोगिता के संबंध में सवाल-जवाब किए। इसके बाद मुख्य अतिथि ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि “कृषि विज्ञान में भगवान शंकर को पहला वैज्ञानिक माना जाता है। उन्होंने सबसे पहले अपने पुत्र गणेश पर प्रयोग किया था। उन्होंने कहा कि तीन सवालों व्हाट, व्हाय, हाउ से विज्ञान का जन्म होता है”। उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर के बिना कोई कल्चर नहीं हो सकता। आज के विकास में विज्ञान की शक्ति व विकास निहित है। विज्ञान के कारण ही भारत भुखमरी से उबरते हुए हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति कर आम विशेष का कृषि विज्ञान में आमूल चूल परिवर्तन ला दिया है। उन्होने स्लाइड के मध्यम से मधुमक्खी पालन, शहद प्राप्ति, औषधीय पौधे जैसे- तुलसी, सतावर, केवाच, सर्पगंधा, पायोली आदि के गुणधर्म, विकास तथा उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विज्ञान के दो पहलू हैं; विकास के साथ ही हानिकारक प्रभाव भी है, जिसे जानना व रोकना होगा। तथा उन्होंने प्राकृतिक सन्तुलन के साथ विकास की बात कही।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ उप प्राचार्या श्रीमती पी आर शंकरी के द्वारा किया गया।



