Today, the code of conduct will be implemented, as well as the dates of Lok Sabha elections will be announced. Know which things will be banned?
चुनाव आयोग यानी लोकसभा चुनाव से संबंधित तारीखों का ऐलान आज करने वाला है. इसके साथ ही पूरे देश में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी. आचार संहिता लगने के बाद नेताओं और सरकार में शामिल लोगों पर कई तरह के प्रतिबंध लग जाते हैं.
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर इलेक्शन कमीशन आज यानी शनिवार को तारीखों का ऐलान करेगा. इसके साथ ही पूरे देश में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक बरकरार रहेगी. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने कुछ नियम बनाए हैं, उसे ही आचार संहिता कहा जाता है. इसके लागू होते ही कई बदलाव हो जाते हैं. सरकार के कामकाज में कई अहम बदलाव हो जाते हैं.
आचार संहिता लागू होने के बाद क्या बदलाव आएंगे?
चुनाव पैनल के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि चुनाव का ऐलान होने के बाद मंत्रियों और अन्य अधिकारियों को किसी भी वित्तीय अनुदान की घोषणा करने या उसके वादे करने से रोक लग जाती है.
सिविल सेवकों को छोड़कर, सरकार से जुड़े किसी भी व्यक्ति पर शिलान्यास करने या किसी भी प्रकार की परियोजनाओं या योजनाओं को शुरू करने पर रोक.
इस दौरान सड़कों के निर्माण, पेयजल सुविधाओं के प्रावधान आदि से संबंधित वादे भी नहीं किए जा सकते हैं
लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग आज दोपहर तीन बजे करेगा।
आचार संहिता कब तक रहती है प्रभावी?
चुनाव आयोग जब चुनाव की तारीखों की घोषणा करता है। उसी के साथ ही आचार संहिता लागू हो जाती है। इस बार आचार संहिता कल यानी (16 मार्च, 2024) से लागू हो जाएगी। क्योंकि चुनाव आयोग शनिवार को चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। आचार संहिता निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहती है। या दूसरे शब्दों में कहें तो आचार संहिता चुनावी परिणाम आने तक लागू रहती है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही आचार संहिता समाप्त हो जाती है।
सरकार नहीं कर सकती ट्रांसफर-पोस्टिंग
आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी की ट्रांसफर-पोस्टिंग सरकार नहीं कर सकती है। ट्रांसफर कराना बहुत जरूरी हो गया हो, तब भी सरकार बिना चुनाव आयोग की सहमति के ये निर्णय नहीं ले सकती है। इस दौरान राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त जरूरत के हिसाब से अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग कर सकते हैं।
आचार संहिता के दौरान किन कार्यों पर होती है पाबंदी?
चुनावी बेला में आचार संहिता के तहत जानकारी दी जाती है कि राजनीतिक पार्टियां और प्रत्याशी क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते हैं। यह ऐसे कार्य होते हैं जो चुनाव को डायरेक्ट या फिर इनडायरेक्ट रूप से चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
राजनीतिक दलों को रैली, जुलूस या फिर मीटिंग के लिए परमिशन लेनी होती है।
धार्मिक स्थलों और प्रतीकों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान नहीं किया जाता है।
मतदाताओं को किसी भी तरह से रिश्वत नहीं दी जा सकती है।
क्या क्या करने पर मनाही होती है?
सरकारी खर्च पर मंत्री इलेक्शन रैली नहीं कर सकते हैं. इस दौरान मंत्री सरकारी वाहनों का इस्तेमाल भी सिर्फ अपने निवास से ऑफिस तक जाने के लिए कर सकते हैं. चुनावी रैलियों और यात्राओं के लिए इनका इस्तेमाल नहीं हो सकता.
आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी ऐसे आयोजन में नहीं किया जा सकता जिससे किसी राजनीतिक पार्टी को फायदा पहुंचता हो. सभी तरह की सरकारी घोषणाएं, लोकार्पण, शिलान्यास जैसे कई तरह के आयोजन नहीं किए जा सकते हैं. लेकिन अगर पहले ही कोई काम शुरू हो गया है तो वो जारी रह सकता है.
मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा या किसी भी धार्मिक स्थल का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं हो सकता.
आचार संहिता में सरकार किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी का ट्रांसफर या पोस्टिंग नहीं कर सकती.



