How do brokers give confirmed tickets, 150 to 200 waiting in trains, this is not a trick, it is a hoax, know how the entire process happens.
हर त्यौहारी सीजन में ट्रेन से सफर करना एक मुश्किल काम होता है क्योंकि, कंफर्म टिकट आसानी से नहीं मिलता है. हालात ये होते हैं कि 2-3 महीने पहले से ट्रेनों में टिकटों की वेटिंग देखने को मिलती है. ऐसी स्थिति में लाखों यात्री कंफर्म टिकट के लिए ट्रैवल एजेंट और दलाल के पास पहुंचते हैं या फिर तत्काल कोटे से बुकिंग कराते हैं. हालांकि, तत्काल में टिकट इतनी आसानी से नहीं मिलता है क्योंकि चंद मिनटों में टिकट बिक जाती हैं. ऐसे में लोगों के पास एकमात्र विकल्प होता है कि वे टिकट के लिए एजेंट के पास पहुंचे. सवाल है कि जब ट्रेनों में इतनी वेटिंग होती है तो दलालों को कंफर्म टिकट कैसे मिल जाती है.
क्या ट्रैवल एजेंट को कोई खास क्वोटा मिलता है या उन्हें स्पेशल लॉगिन की सुविधा मिलती है या फिर वे टिकट बुकिंग के लिए किसी खास ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, आम लोगों की ये सभी धारणाएं गलत हैं. आइये आपको बताते हैं कि आखिर कैसे ट्रैवल एजेंट या दलाल कंफर्म टिकट यात्रियों तक पहुंचाते हैं.
ट्रिक नहीं ये झांसा है!
ट्रेनों में कंफर्म टिकट हासिल करने के लिए ट्रैवल एजेंट त्यौहारी सीजन से 2-3 महीने पहले एक्टिव हो जाते हैं. दरअसल रेलवे टिकट दलाल अलग-अलग ट्रेनों में अलग-अलग तारीख की टिकट बुक करा लेते हैं. ये टिकट 15 साल से 45 साल के लोगों के नाम पर अलग-अलग नाम से बुक कराई जाती है. दरअसल 15 साल से लेकर 45 साल या उससे थोड़ी अधिक उम्र ऐज ग्रुप में यात्रियों के मिलने की सबसे ज्यादा संभावना होती है.
टिकट किसी और की सफर करे कोई और
आप अब दलालों की कंफर्म टिकट देने की ट्रिक तो जान गए. इसका मतलब है कि आपको मिलने वाली टिकट टिकट किसी और व्यक्ति के नाम पर होती है. हालांकि, दलाल आपको यह कहकर टिकट देता है कि आपसे टीटीई आईडी वगैरह की मांग नहीं करेगा, बस लिस्ट में नाम देखकर आगे बढ़ जाएगा. लेकिन, कई मौकों पर या संदेह होने पर टीटीई आपसे आईडी की मांग कर सकता है. अगर आईडी और टिकट पर प्रिंटेड जानकारी आपस में नहीं मिलती है तो आप परेशानी में फंस सकते हैं.
अगर दलाल आपको इस तरह कंफर्म टिकट देता है तो इस बात की संभावना है कि आपकी सीट बीच सफर में जा सकती है. जिस सीट के लिए आप पहले ही दलाल को दो से तीन गुना तक रकम दे देते हैं उसके पकड़े जाने पर टीटीई भी फाइन लगाता है, साथ ही नई टिकट के लिए आपको फाइन के साथ पैसे देने होते हैं. कुल मिलाकर 400 रुपये की स्लीपर की टिकट की कीमत 2000 तक पहुंच जाती है.
सीट जाएगी और पैसा भी
इस कंडीशन में सबसे पहले सीट जाती है। यह सीट आपको काफी महंगी पड़ सकती है। क्योंकि इस सीट के लिए आपने दलाल को दो से तीन गुना ज्यादा पैसा दिया है और फर्जी टिकट दिखाने के बाद टीटीई आपसे फाइन लेगा वो अलग। इसके बाद आपको नई टिकट बनवानी पड़ेगी, वो भी वेटिंग में। मतलब सीट तो जाएगी ही पैसा भी बहुत खर्च होगा।
जनरल या वेटिंग टिकट लेकर करें सफर
बता दें कि कंफर्म टिकट देने के लिए दलाल 400 की टिकट 2000 रूपए तक में देते हैं। इसलिए दलालाें से टिकट बुक कराने के बजाय सीधे टिकट काउंटर से ही बुकिंग कराएं। भले ही टिकट वेटिंग में हो, लेकिन कम से कम आपको यह सब परेशानियां नहीं झेलनी पड़ेगी और सफर भी अच्छा कटेगा।
मामला रिस्की है
अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई,तो टीटीई सिर्फ लिस्ट में नाम देखकर आगे बढ़ जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आप बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं। अगर टीटीई को जरा भी संदेह हुआ, तो वह आपसे आईडी प्रूफ मांग सकता है। आईडी और टिकट का नाम मैच न होने पर आपको जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
कैसे होती है पूरी प्रोसेस
टिकट अगर किसी और नाम से बुक होती है, तो 100 फीसदी संभावना है कि टिकट पर आपका नाम नहीं होगा। बल्कि दलाल आपसे कह देगा कि टीटीई आईडी नहीं मांगेगा। दरअसल, दलाल लोग टिकट काउंटर से अलग-अलग नामों की टिकट बुक कराते हैं। जब आप उनसे किसी जगह की कंफर्म टिकट मांगते हैं, तो वह आपसे दोगुना पैसा लेकर आपको टिकट दे देता है और कह देता है कि टीटीई आपसे आईडी नहीं मांगेगा बस कंफर्म करने के लिए नाम ही पूछेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि टिकट काउंटर से ली जाने वाली टिकट के लिए आईडी नहीं मांगा जाता। इसलिए दलाल आपको बदला हुआ नाम बताने के लिए कह देता है।



