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माया रुपी सांसारिक बंधन से मुक्त होकर श्री कृष्ण की शरण में आने से जीवन रूपी नैया होगी पार,, टनकेश दुबे

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*भगवान श्री कृष्ण के बाल लीला का हुआ वर्णन*

प्रमोद अवस्थी मस्तूरी*

Ro.No - 13759/40

मस्तूरी।।मस्तूरी भीष्म तिवारी एवं परिवार द्वारा आयोजित मस्तूरी नगर में चल रही संगीत मय श्रीमद भागवत साप्ताहिक ज्ञानयज्ञ कथा में कटघोरा से पधारे महाराज पंडित टांकेश दुबे द्वारा कथा सुनाई जा रही है। जिसमें कथा के पांचवां दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान श्री कृष्णजी की बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने गोपियों के वस्त्र चोरी माखन चोरी करने की कथा बड़े ही सुंदर ढंग से सुनाएं।उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा धर्म के मार्ग पर चलकर समाज सेवा में लोगों को आगे आना चाहिए। मानव जब इस संसार में पैदा लेता है तो चार व्याधि उत्पन्न होते हैं। रोग, शोक, वृद्धापन और मौत मानव इन्हीं चार व्याधियों से धीर कर इस मायारूपी संसार से विदा लेता है। सांसारिक बंधन में जितना बंधोगे उतना ही पाप के नजदीक पहुंचेगा। इसलिए सांसारिक बंधन से मुक्त होकर परमात्मा की शरण में जाओ तभी जीवन रूपी नैय्या पार होगी। आज के दौर में परेशानी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। इससे समाज में खींचतान, स्वार्थ, लोभ, दुख. पतन, विकृतियों का अम्बार लगा हुआ है। ऐसे में समाज को युग के अनुरूप दिशा चिंतन, व्यवहार, परमार्थ के लिए हृदय में परिवर्तन के लिए श्रीमद भागवत कथा पुराण का सुनना चाहिए

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