मनेन्द्रगढ़। वनमण्डल कार्यालय में हाल ही में जारी कर्मचारियों के नवीन कार्य आबंटन आदेश ने विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। आदेश के तहत कई कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया, लेकिन लंबे समय से एक ही पद और शाखा पर कार्यरत कुछ कर्मचारियों के नाम सूची से गायब रहने पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को तबादला सूची में शामिल नहीं किया गया, वे वर्षों से विभाग की महत्वपूर्ण और प्रभावशाली शाखाओं में पदस्थ हैं। विभाग के भीतर यह चर्चा है कि इन कर्मचारियों की राजनीतिक पहुंच और अधिकारियों से निकटता के चलते इन्हें स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
जानकारों का यह भी कहना है कि यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे इन कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाता, तो विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों से पर्दा उठ सकता था। यही वजह है कि उनके नामों को सूची से दूर रखा गया।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल में कथित अनियमितताओं और घोटालों को लेकर सत्तारूढ़ दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने मुखर होकर आवाज उठाई थी। हालांकि, समय के साथ यह मामला ठंडा पड़ता नजर आ रहा है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वनमण्डल अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई करेंगे, या फिर प्रभावशाली कर्मचारियों को पूर्ववत संरक्षण मिलता रहेगा। विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हुई हैं



