Home Blog 1975 में देशवासियों पर थोपे गए आपातकाल से रूबरू होना बेहद जरूरी...

1975 में देशवासियों पर थोपे गए आपातकाल से रूबरू होना बेहद जरूरी : सांसद श्री नाग

0

It is very important to know the Emergency imposed on the countrymen in 1975: MP Shri Nag

आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर मनाया गया संविधान हत्या दिवस

Ro.No - 13759/40

उत्तर बस्तर कांकेर, 25 जून 2025/ वर्ष 1975 में आज ही के दिन तत्कालीन सरकार द्वारा सम्पूर्ण देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लगाया गया था। इसके 50 वर्ष पूर्ण होने पर आज ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मनाया गया। इस दौरान जिले के मीसाबंदियों के परिजनों को सम्मानित किया गया, साथ ही आपातकाल पर परिचर्चा की गई। इस अवसर पर छायाचित्र प्रदर्शनी के माध्यम से 1975 के आपातकाल के दौर को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री भोजराज नाग तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री आशाराम नेताम उपस्थित थे।
जिला पंचायत के सभाकक्ष में आज दोपहर 12.30 बजे आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि के आसंदी से सांसद श्री नाग ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान सर्वोपरि है। उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 1975 में तत्कालीन सरकार द्वारा देशवासियों पर अचानक थोपे गए आपातकाल के काले सच की सभी को जानकारी होना बेहद जरूरी है। 25 जून वह दिन है, जब लोकतंत्र के मूल्यों की हत्या हुई थी। सत्ता के लालच में नियम व कानून को ताक पर रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए तत्कालीन सरकार ने पूरे देश में इमरजेंसी लगा दी। सांसद श्री नाग ने बताया कि इसका विरोध करने वाले जनप्रतिनिधियों, देशवासियों और मीडिया संस्थानों की आवाज को दबाया गया तथा उन्हें जेल में डाल दिया गया। लोगों को जबरदस्ती नसबंदी कराई गई। उन्होंने जिले के मीसाबंदियों को श्रद्धांजलि देते हुए देश के संविधान का पालन एवं अनुसरण करने की बात कही। विशिष्ट अतिथि श्री नेताम ने अपने उद्बोधन में कहा कि 1975 में लगाए गए आपातकाल का दंश पूरे देश ने झेला। इसके विरोध में उठने वाले स्वर को क्रूरतापूर्वक दबाया गया। इसके विरूद्ध आगे आने वाले शीर्ष नेताओं एवं आम जनता को चिन्हांकित करके जेलों में डाल दिया गया। श्री नेताम ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस काले सच को सामने लाने का प्रयास किया, जिससे हमें व आने वाली पीढ़ी को अवगत होने की जरूरत है। इस अवसर पर कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी, नगरपालिका कांकेर के अध्यक्ष श्री अरूण कौशिक तथा नागरिक श्री महेश जैन ने भी 25 जून 1975 में लगाए गए आपातकाल पर आधारित परिचर्चा ‘संविधान की हत्या’ विषय पर अपने-अपने विचार प्रकट किए।

आपातकाल के दौरान पिता 19 महीने तक जेल में रहे- श्रीमती शर्मा

संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार आज ‘आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर संविधान हत्या दिवस’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आपातकाल पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन किया गया, साथ ही जिला पंचायत के परिसर में छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई तथा गोष्ठी सह परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मीसाबंदी के परिजनों को शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। मीसाबंदी स्व. श्री रामप्रेम दुबे की पुत्री श्रीमती सुमन शर्मा ने बताया कि वह सिर्फ ढाई साल की थीं जब उनके पिता को मीसा एक्ट के तहत बंदी बनाया गया। घर के इकलौते कमाऊ सदस्य को अचानक जेल में डाल देने से पूरे परिवार के समक्ष जीविकोपार्जन की समस्या आ गई थी। श्रीमती शर्मा ने बताया कि उनके पिता को मीसा एक्ट के तहत 19 माह तक जेल में रहे। इसी तरह मीसाबंदी स्व. श्री मुरलीधर वर्मा की पत्नी श्रीमती पुष्पादेवी वर्मा ने बताया कि उनके पति को पुलिस द्वारा तब बंदी बनाया गया, जब वे भोजन कर रहे थे। उन्हें जेल में अनेक तरह की यातनाएं दी गईं। आपातकाल के दंश से उनका परिवार काफी लंबे समय तक प्रभावित रहा। उल्लेखनीय है कि जिले में मीसा एक्ट के तहत कुल चार लोगों को बंदी बनाया गया था, जिनमें स्व. श्री त्रिलोक सिंह, स्व. श्री स्वदेश रंजन गुहा, स्व. श्री मुरलीधर वर्मा तथा स्व. श्री रामप्रेम दुबे शामिल थे। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले सहित काफी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी व महिलाएं उपस्थित थीं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here