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देश का विभाजन विश्व की सबसे भयावह त्रासदी-केदार कश्यप

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Partition of the country is the world’s most horrific tragedy – Kedar Kashyap

कांकेर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवसव14 अगस्त के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी जिला कांकेर द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
शहर के पुराने बस स्टैंड में जहाँ विभाजन से संबंधित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई वही भाजपा कार्यलय कमल सदन में विभाजन की त्रासदी पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप थे ।
उन्होंने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 14 अगस्त-विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर सर्वप्रथम इस विभीषिका में प्राण गंवाने वाले सभी जनों को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत का विभाजन सिर्फ एक देश का विभाजन नहीं था, यह मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी थी ।
भाईयों और बहनों, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत की एकता और अखंडता को कैसे चोट पहुंचाई गई, यह उसकी भी याद दिलाता है। विभाजन का दंश झेलने वाली पीढ़ी ने जो वेदना व्यक्त की है, उसे वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां कभी नहीं भूलेंगी। भारत विभाजन के दौरान लोगों का विस्थापन हुआ, लोग अपनों से बिछड़ गए। लोगों ने मजबूरी में जिस तरह पलायन किया उसकी तस्वीरों को कोई नहीं भूल सकता है।
मित्रों, यह दिवस हमें एकता और अखंडता की आवश्यकता व उसके लिए एकजुट रहने का सबक भी देता है। इतिहास में की गई गलतियों से जो देश और समाज सीख नहीं लेते हैं, उन्हें हु बड़े नुकसान उठाने पड़ते हैं।
इतिहास का यदि सही तरीके से मूल्यांकन किया जाए तो पता चलता है कि भारत का विभाजन कुछ राजनीतिक ताकतों के स्वार्थ को पूरा करने के लिए किया गया। मुस्लिम लीग से लेकर जिन्ना को खुश करने के लिए यह सबकुछ हुआ ।
जिस स्वतंत्रता के लिए हमारे हजारों-लाखों वीर सेनानियों ने प्राणों का बलिदान दिया, क्या उन्हें भारत का विभाजन स्वीकार्य होता । 15 अगस्त 1947 को एक ओर जहां देश आजादी का जश्न मना रहा था, वहीं दूसरी ओर देश के विभाजन का दर्द भी हमें सहना पड़ा। विभाजन के दौरान 20 लाख गैर-मुसलमान पूर्वी बंगाल, जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बना, वहां से निकलकर पश्चिम बंगाल आए, भारत ने मानवता के कल्याण के नाम पर सभी को अपनाया । भारत ने कभी धर्म या मजहब के नाम पर किसी से भेदभाव नहीं किया। क्योंकि हम सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुंबकम के मंत्र को मानने वाले लोग हैं।
1950 में 20 लाख और गैर मुस्लमान पश्चिम बंगाल आए । दस लाख मुसलमान पश्चिम बंगाल से पूर्वी पाकिस्तान चले गए। इस विभीषिका 10 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं।
17 दिसम्बर 1947 को सिन्ध के हैदराबाद तथा 6 जनवरी 1948 को कराची में हुए भयावह दंगों ने हिंदू एवं सिख तथा अल्पसंख्यकों को काफी दंश झेलना पड़ा।
उन्होंने बताया कि कि 33,000 हिंदू महिलाओं का अपहरण कर लिया गया था। विभाजन के दौरान महिलाओं को जो पीड़ा झेलनी पड़ी, उनका अनुभव पुरुषों से बहुत अलग था।
मित्रों, यह अवसर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ जैसे राष्ट्रवादी संगठनों के द्वारा किए गए राहत कार्यों का भी याद करने का है। संघ के कार्यकर्ताओ ने विभाजन का दंश झेलने वाले लोगों के लिए राहत कार्य संचालित किया, वह दुनिया भर में प्रेरक है। संघ द्वारा संचालित राहत कैंपों में भोजन, कपड़े से लेकर रक्त दान व उपचार की व्यवस्था की जाती थी। इन राहत कैंपों में किसी व्यक्ति के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं किया गया।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस सिर्फ 1947 में सक्रिय विभाजनकारी ताकतों को ही बेनकाब नहीं करता है…. आज भी ऐसे तत्व हैं… इनसे समाज को बचना होगा। देश में विभाजनकारी तत्व समय- समय पर अलग-अलग रूप लेकर सामने आते हैं।
इस अवसर पर मैं यह भी कहना चाहता हूं कि आज माओवाद, आतंकवाद, शहरी नक्सलवाद, मजहबी कट्टरता के शक्ल में जो विभाजनकारी ताकतें देश में सक्रिय हैं, उनसे भी समाज को बचना होगा ।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दुओ को प्रताड़ित किया जा रहा है । हत्याएं की जा रही है । कश्मीर से 7 लाख हिन्दू विस्थापित हुए । भारत के हिन्दुओ के पास विश्व मे और कौन सा देश है जो अराजकता पर हिन्दुओ को शरण दे। खालिदा जिया के बेटे के साथ हमारे देश के कुछ नेता बैठके करते है । भारत मे भी ऐसी शक्तियाँ काम कर रही है जो भारत मे अराजकता फैलाना चाहते है । भारत के कुछ विपक्षी नेता भारत विरोधी ताकतों के साथ खड़े होते है ।
मुस्लिम देशों में मुस्लिमो के प्रताड़ना पर बड़े बड़े ट्वीट करने वाले देश के विपक्षी नेता बंगलादेश के हिन्दुओ की हत्याओं, प्रताड़ना पर मुह बन्द कर लेते है ।
अंत में यही आह्वान करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देना चाहूंगा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस एक राष्ट्र के रूप में एकजुट रहने का संदेश देता है। यह दिवस हमें राष्ट्र विरोधी तत्वों से सावधान रहने का भी संदेश देता है। विकसित और अखंड भारत का स्वप्न तभी पूरा होगा ।
भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश लाटिया ने भी विभाजन पर अपने विचार रखे ।
संगोष्ठी को सिंध समाज के डॉ लालवानी ने संबोधित करते हुए समाज के पाकिस्तान से विस्थापन व उसके बाद झेले गए त्रासदी का वर्णन किया । उन्होंने बताता की किस प्रकार से सिंध समाज को अपना सब कुछ छोड़कर अपने घर , परिवार से विस्थापित होना पड़ा ।
संगोष्ठी को प्रदेश मंत्री महेश जैन, नरेंद्र दवे ने भी संबोधित किया । संगोष्ठी का संचालन बृजेश चौहान ने व आभार दिलीप जायसवाल ने किया ।
संगोष्ठी पश्चात वन मंत्री केदार कश्यप , लोकसभा सांसद भोजराज नाग , भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश लाटिया, विधायक आशाराम नेताम सहित भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं ने पुराने बस स्टैंड में चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। तत्पश्चात शहर के ऊपर नीचे रोड से पुराने बस स्टैंड तक मौन जुलूस निकाला गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम के जिला संयोजक निपेन्द्र पटेल, डॉ ईश्वर सिन्हा का विशेष योगदान रहा ।
इस अवसर पर पूर्व सांसद मोहन मंडावी, सुमित्रा मारकोले, भरत मटियारा, शिशुपाल शोरी, हलधर साहू, राजीव लोचन सिंह, तारा ठाकुर, निर्मला नेताम, देवेंद्र भाऊ, हीरा मरकाम, सुषमा गंजीर, राजा देवनानी, नारायण पोटाई, यशवंत सुरोजिया, किरण नरेटी, मीरा सलाम, मनोज ध्रुव, विजय लखवानी, गिरधर यादव, अरुण कौशिक, राजा पांडेय, निखिल राठौर, सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता व आम नागरिक उपस्थित

Ro.No - 13672/156

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