Bastar region is being sacrificed for the interests of public representatives elected from reserved seats
कांकेर। आदिवासी कार्यकर्ता एवं किसान नेता संजय पंत ने प्रेस नोट जारी कर पर्यावरण को हो रहे नुकसान एवं शासन-प्रशासन की उपेक्षा पर समीक्षात्मक टिप्पणी की है। किसान नेता आगे कहते हैं कि भारतीय समाज में आदिवासियों, दलितों एवं पिछड़ों सहित सभी वंचित वर्गों के हितों के लिए बाबा भीमराव अंबेडकर के अथक प्रयासों से भारतीय संविधान में जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई। धन और बल के जोर से चुने जाने वाले आरक्षित सीट के जनप्रतिनिधियों ने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए अपने ही समाज से गद्दारी करके संपूर्ण बस्तर क्षेत्र को पूंजीवादी एवं शोषणकारी ताकतों के हाथों में बलि देने हेतु सौंप दिया है। बस्तर क्षेत्र अंतर्गत बीजापुर जिले के भोपालपटनम तहसील में रामपुरम पंचायत में बाहरी क्षेत्र से आने वाले शोषणकारी ताकतों को बसाने के लिए जिला प्रशासन एवं वन विभाग के मिलीभगत से सैकड़ो एकड़ हरे-भरे वन क्षेत्र को सफाचट कर दिया गया है। ठेकेदारी, कमीशनखोरी एवं भ्रष्टाचार में डूबे हुए बस्तर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने गद्दारी करके अपने ही समाज के जल, जंगल एवं जमीन को बाहरी संस्कृतियों के हाथों में सौंप दिया है। दुख तो तब होता है जब आदिवासी किसान भाइयों का सब कुछ लुटा जा रहा है और समाज प्रमुखों ने भी पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है। आदिवासी किसान समाज के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का कार्य संपूर्ण राज्य में पूरी ताकत से चल रहा है। एक आम आदिवासी किसान भाई का निवेदन है कि इस षड्यंत्र को शीघ्र ही रोका जाए। यदि प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का यह खेल नहीं रोका गया तो एक आम आदिवासी किसान भाई द्वारा भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध व्यापक जन आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। यदि रामपुरम पंचायत के एक इंच जमीन को भी बाहरी संस्कृतियों को दिया जाएगा तो इस आंदोलन की शुरुआत बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले से ही निश्चित है। भारतीय किसान यूनियन द्वारा आंदोलन के माध्यम से आरक्षित सीटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों को यह याद दिलाया जाएगा कि उन्होंने अपने ही समाज से गद्दारी करते हुए समाज को अंधेरे में रखा। इस पूरे मामले में बीजापुर जिला प्रशासन की घोर लापरवाही स्पष्ट है जो भारतीय किसान यूनियन एवं जिला प्रशासन के बीच सीधे टकराव की स्थिति निर्मित करता है। भारतीय किसान यूनियन केंद्र एवं राज्य सरकारों से यह आग्रह भी करता है कि पांचवी अनुसूची एवं पेसा कानून लगे बस्तर क्षेत्र में आदिवासी जनता के प्रति संवेदनशील अधिकारियों की ही पदस्थापना की जाए।



