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राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों का बड़ा योगदान: ईश्वर कुंभकार

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Volunteers have a huge contribution in nation building: Ishwar Kumbhakar

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लव कुश व्यवसायी शाखा का वार्षिक उत्सव संपन्न

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रायगढ़। रायगढ़ नगर (बेलादुला) – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की लव कुश व्यवसायी शाखा (प्रभात शाखा), जो बेलादुला जूदेव गार्डन में आयोजित होती है, ने रविवार को अपना वार्षिक उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर शाखा में विभिन्न शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें योग-व्यायाम, सूर्य नमस्कार, दंड संचालन, गीत और अमृत वचन प्रमुख रहे।

वार्षिक उत्सव में दिखा शारीरिक और बौद्धिक कौशल

वार्षिक उत्सव के दौरान स्वयंसेवकों ने शाखा में सीखे गए शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रमों का भव्य प्रदर्शन किया। पूरे वर्ष भर में शाखा के माध्यम से सीखने वाली गतिविधियों का सारांश इस एक घंटे के आयोजन में प्रस्तुत किया गया। स्वयंसेवकों द्वारा किए गए योग और सूर्य नमस्कार ने शारीरिक स्फूर्ति का परिचय दिया, जबकि दंड संचालन और गीत प्रस्तुतियों ने राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का संदेश दिया।

राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित संघ के जिला प्रचारक ईश्वर कुंभकार ने अपने उद्बोधन में शाखा वार्षिकोत्सव के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शाखा में आने से स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत होता है, जो समाज के उत्थान और विकास में सहायक होता है।

मुख्य अतिथि का संदेश

मुख्य अतिथि समाजसेवी दीनदयाल पटेल ने संघ की शाखाओं में चल रहे शारीरिक और बौद्धिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि संघ के कार्य निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र भक्ति का प्रतीक हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संघ की शाखाओं में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित हों और समाज कल्याण में योगदान दें।

उत्सव में बढ़-चढ़कर हुई सहभागिता

इस वार्षिक उत्सव में बेलादुला और आस-पास की बस्तियों से लगभग 100 से अधिक मातृशक्ति और बंधु-गण उपस्थित रहे। बस्ती के प्रचार प्रमुख ने जानकारी देते हुए बताया कि संघ के ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और समर्पण की भावना को बल मिलता है।

संघ के उत्सव से समाज को प्रेरणा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मनाया गया यह वार्षिक उत्सव न केवल स्वयंसेवकों के कौशल का प्रदर्शन था, बल्कि समाज में शारीरिक और बौद्धिक विकास के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास भी था।
उत्सव के समापन पर सभी ने राष्ट्रगीत का गायन कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

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