JanjgirChampa News:-जांजगीर-चांपा जिले के डोंगरी गांव के किसान ओमप्रकाश कुर्रे ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर 0.40 एकड़ में ग्राफ्टेड बैगन की खेती शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। पहले धान से जहां उन्हें करीब 40,700 रुपये का शुद्ध लाभ मिलता था, वहीं बैगन की खेती से यह बढ़कर लगभग 96,000 रुपये तक पहुंच गया। यह सफलता जिला उद्यानिकी विभाग और सहायक संचालक रंजना माखीजा के तकनीकी सहयोग व सतत मार्गदर्शन का परिणाम है। यही नहीं, अब यह किसान बाकी किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गया है कि पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक अपनाना ही असली गेम चेंजर है।
JanjgirChampa जांजगीर-चांपा | छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के डोंगरी गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो बताती है कि अगर किसान को सही दिशा, तकनीक और मार्गदर्शन मिल जाए तो खेती सिर्फ जीविका नहीं, बल्कि मुनाफे का मजबूत जरिया बन सकती है।
ग्राम डोंगरी के प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश कुर्रे, पिता स्व. सुखीराम कुर्रे, जिनके पास लगभग 1.50 एकड़ कृषि भूमि है, पहले पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे। सीमित संसाधनों और परंपरागत तरीकों के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था।
धान खेती से सीमित आय
किसान द्वारा इस वर्ष धान की खेती में लगभग 17 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे कुल आय करीब 52,700 रुपये हुई।
सभी कृषि लागत (खाद, मजदूरी एवं अन्य खर्च) निकालने के बाद किसान को लगभग 40,700 रुपये का शुद्ध लाभ ही प्राप्त हो सका।
उद्यानिकी विभाग से मिली नई दिशा
इसके बाद किसान ने जिला उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और विभागीय योजनाओं की जानकारी ली। यहां से उनकी खेती की दिशा बदल गई।
विभाग की सहायक संचालक रंजना माखीजा के कुशल निर्देशन और सतत मार्गदर्शन में किसान ने 0.40 एकड़ भूमि पर ग्राफ्टेड बैगन की खेती शुरू की।
विभाग द्वारा किसान को उन्नत कृषि तकनीक, पौध प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और विपणन संबंधी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई गईं, जिसका सीधा असर उत्पादन और आय पर दिखाई दिया।
ग्राफ्टेड बैगन से दोगुनी से अधिक आमदनी
उद्यानिकी फसल के रूप में की गई ग्राफ्टेड बैगन की खेती ने किसान की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की।
इस फसल से किसान को लगभग 1,84,000 रुपये की कुल आय प्राप्त हुई।
सभी लागत घटाने के बाद किसान को करीब 96,000 रुपये का शुद्ध लाभ हासिल हुआ, जो पारंपरिक धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
किसान की बदलती सोच
किसान ओमप्रकाश कुर्रे का कहना है कि पहले वे केवल धान की खेती तक सीमित थे, लेकिन विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग ने उन्हें खेती में नई दिशा दी है। अब वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विभागीय प्रयासों से बढ़ रही आत्मनिर्भरता
जिला उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को लगातार आधुनिक खेती, उन्नत तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों से जिले के किसान अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में देख रहे हैं।



