मुंगेली जिला से हरजीत भास्कर की रिपोर्ट
=“266 की यूरिया, 450 में बिक्री” — किसानों ने लगाया मनमानी व जबरन सामान थमाने का आरोप
मुंगेली।- जिले में खरीफ सीजन शुरू होते ही खाद की मांग बढ़ गई है, लेकिन इसी के साथ खाद की कालाबाजारी और किसानों से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। ग्राम सिंघनपुरी निवासी किसान पीयूष सिंह ठाकुर ने जिला कलेक्टर मुंगेली को लिखित शिकायत सौंपकर क्षेत्र के कुछ खाद विक्रेताओं पर शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया खाद बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत सामने आने के बाद किसानों में आक्रोश बढ़ गया है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार किसानों को पहले यूरिया खाद का निर्धारित मूल्य 266 रुपये प्रति बोरी बताया जाता है, लेकिन जब खाद वाहन में लोड हो जाती है तब उनसे 450 रुपये प्रति बोरी तक की राशि वसूली जाती है। किसानों का कहना है कि जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उन्हें खाद देने से मना कर दिया जाता है या फिर घंटों इंतजार कराया जाता है।
👉“खाद के साथ जबरन दूसरी सामग्री खरीदने का दबाव”,
शिकायत में सेतंगगा स्थित “ठाकुर अर्जुन सिंह कृषि केन्द्र” के संचालक पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। किसानों का कहना है कि दुकान में खाद लेने पहुंचे किसानों पर अन्य कृषि सामग्री जैसे दवा, सूक्ष्म पोषक तत्व और अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है। कई किसानों ने दावा किया कि यदि अतिरिक्त सामग्री खरीदने से मना किया जाता है तो पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती।
इतना ही नहीं, किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार सही बिल और पक्की रसीद देने में आनाकानी की जाती है, जिससे बाद में शिकायत या प्रमाण प्रस्तुत करने में कठिनाई होती है। किसानों का कहना है कि यह न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि शासन के स्पष्ट निर्देशों की भी अवहेलना है।
👉खरीफ सीजन में बढ़ी किसानों की चिंता,
जिले में खरीफ फसल की तैयारी तेज हो चुकी है। धान बोनी से पहले किसानों को बड़ी मात्रा में यूरिया और अन्य खाद की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में खाद की कृत्रिम कमी और अधिक दाम वसूले जाने की शिकायतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी हो चुकी है, ऊपर से खाद की कालाबाजारी ने उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर कर दी है।
कई किसानों ने बताया कि खेती के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ रहा है। ऐसे में निर्धारित मूल्य से लगभग दोगुनी कीमत चुकाना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
👉“प्रशासन करे छापेमार कार्रवाई”,
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद दुकानों में स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की जांच की जाए तथा जिन दुकानदारों द्वारा अधिक कीमत वसूली जा रही है उनके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि कई दुकानों में वास्तविक मूल्य सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जाती, जिससे ग्रामीण किसान आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं।
शिकायतकर्ता पीयूष सिंह ठाकुर ने कलेक्टर से मांग की है कि जिले में विशेष जांच दल गठित कर खाद विक्रेताओं की जांच कराई जाए, किसानों को शासन द्वारा तय उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराई जाए तथा कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं।
👉किसानों में बढ़ रहा आक्रोश,
ग्रामीण इलाकों में खाद की बढ़ती कीमतों को लेकर किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि खाद की कालाबाजारी रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से किसानों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



