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बिरसिंघा में सरपंच की उपेक्षा से उठे सवाल, शिलालेख से नाम गायब होने पर पंचायती राज व्यवस्था. की गरिमा पर लगा प्रश्नचिन्ह

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रिपोर्टर सतीश शुक्ला लैलूंगा

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लैलूंगा। विकासखंड लैलूंगा के ग्राम पंचायत बिरसिंघा में आदिवासी बालक छात्रावास एवं भवन निर्माण के लोकार्पण शिलालेख में ग्राम पंचायत के निर्वाचित सरपंच शिव प्रकाश भगत का नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव में जनता अपने मताधिकार का उपयोग कर सरपंच को गांव का मुखिया चुनती है और गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर होती है। इसके बावजूद शासकीय निर्माण कार्यों के शिलालेख में स्थानीय सरपंच की अनदेखी किया जाना पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बिरसिंघा में आदिवासी विकास विभाग द्वारा लगभग 162.76 लाख रुपये की लागत से निर्मित आदिवासी बालक छात्रावास भवन का लोकार्पण किया गया। शिलालेख में मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, सांसद, विधायक तथा जिला एवं जनपद पंचायत प्रतिनिधियों के नाम अंकित किए गए हैं, लेकिन ग्राम पंचायत के निर्वाचित सरपंच का नाम कहीं भी दर्ज नहीं है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने और गांव स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त करने का उद्देश्य रखा गया था। सरपंच गांव की सबसे महत्वपूर्ण निर्वाचित इकाई का प्रमुख होता है, इसलिए किसी भी विकास कार्य में उसकी भूमिका और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। शिलालेख से सरपंच का नाम गायब होना न केवल एक जनप्रतिनिधि की उपेक्षा है, बल्कि पंचायत व्यवस्था के महत्व को भी कम करने वाला कदम माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन बड़े जनप्रतिनिधियों को प्राथमिकता देते हुए गांव स्तर के निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपेक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि गांव की सरकार कहे जाने वाले सरपंचों को इसी प्रकार नजरअंदाज किया जाता रहा तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि पंचायत प्रतिनिधि किसी भी राजनीतिक दल की जमीनी ताकत होते हैं। यदि उनके सम्मान और अधिकारों की अनदेखी होती है तो इसका असर भविष्य में जनसमर्थन पर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और पंचायत प्रतिनिधियों को उनका उचित सम्मान दिलाना चाहिए।

हालांकि इस मामले में संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में होने वाले सभी शासकीय निर्माण कार्यों के शिलालेख में संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों का नाम भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बना रहेगा

मैं शिव प्रकाश भगत सरपंच वीरसिंघा ग्राम पंचायत विकासखंड लैलूंगा मैं शासन प्रशासन को अवगत कराना चाहता हूं की पंचायत प्रतिनिधियों का सम्मान होना चाहिए क्योंकि जनता उन पर भरोसा करके उनको सम्मान दिया है और अपना मुखिया चुना है सरपंच संघ के अध्यक्ष होने के नाते मेरे को यह बात कहना पड़ रहा है क्योंकि आने वाले समय में मेरे सरपंच साथियों के साथ इस प्रकार का घटना की पुर्नावृति न हो

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