फ्री डिनर के जाल में फंसाकर बेचा हॉलिडे पैकेज, फिर बदलीं शर्तें; उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को लगाई फटकार, राशि लौटाने और क्षतिपूर्ति देने के आदेश
रायगढ़ की महिला उपभोक्ता को बड़ी राहत, मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी का खर्च भी देना होगा
रायगढ़। सोशल मीडिया पर फ्री डिनर और आकर्षक पर्यटन पैकेज का लालच देकर उपभोक्ता से 50 हजार रुपए लेने तथा बाद में पैकेज की शर्तें बदलकर राशि वापस नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग रायगढ़ ने भोपाल की विंडसर हॉलिडेज कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी की कार्यप्रणाली को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए शिकायतकर्ता मंजू गुप्ता को जमा राशि वापस करने, उस पर ब्याज देने, मानसिक प्रताड़ना के लिए क्षतिपूर्ति तथा वाद व्यय अदा करने का आदेश दिया है।
यह फैसला आयोग की अध्यक्ष रंजना दत्ता तथा सदस्य राजश्री अग्रवाल और राजेन्द्र कुमार पाण्डेय की खंडपीठ ने 22 मई 2026 को सुनाया। मामले में शिकायतकर्ता मंजू गुप्ता की ओर से अधिवक्ता प्रवीण त्रिपाठी ने पैरवी की है । विंडसर हॉलिडेज की ओर से सुनवाई के दौरान कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
प्रकरण के अनुसार रायगढ़ निवासी मंजू गुप्ता ने आयोग को बताया कि सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर प्रसारित फ्री डिनर योजना के माध्यम से उन्हें परिवार सहित जिंदल रीजेंसी होटल में आयोजित एक प्रस्तुति कार्यक्रम में बुलाया गया था। वहां कंपनी के प्रतिनिधियों ने 75 हजार रुपए में भारत के विभिन्न शहरों में 18 दिनों के हॉलिडे पैकेज का आकर्षक प्रस्ताव रखा। प्रस्तुति के दौरान दावा किया गया कि पैकेज में पति-पत्नी के साथ उनके दोनों बच्चों को भी होटल, स्विमिंग पूल, स्पा, गेम्स तथा अन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि उसी दिन पैकेज बुक किया जाता है तो 5 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट दी जाएगी।
इन दावों और आश्वासनों पर विश्वास करते हुए शिकायतकर्ता ने अपने परिवार की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई और कंपनी की मांग पर 50 हजार रुपए अग्रिम राशि के रूप में जमा कर दिए। लेकिन दो दिन बाद कंपनी की ओर से किए गए सत्यापन कॉल में पूरी तस्वीर बदल गई। शिकायतकर्ता को बताया गया कि उनके बच्चे पैकेज में शामिल नहीं होंगे क्योंकि उनकी आयु निर्धारित सीमा से अधिक है। इतना ही नहीं, बच्चों के लिए अलग कमरे का किराया तथा प्रत्येक छह दिन के लिए अतिरिक्त शुल्क भी देने की बात कही गई।
अचानक बदली गई शर्तों से खुद को ठगा महसूस करते हुए शिकायतकर्ता ने पैकेज लेने से इंकार कर दिया और तत्काल अपनी राशि वापस मांगी। शिकायतकर्ता का कहना था कि यदि ये शर्तें पहले बताई जातीं तो वह कभी भी राशि जमा नहीं करतीं। कंपनी ने ईमेल के माध्यम से रिफंड प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन दिया, लेकिन कई बार ईमेल, फोन और अनुस्मारक भेजने के बाद भी न तो पैसा लौटाया गया और न ही कोई ठोस जवाब दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान विंडसर हॉलिडेज ने दावा किया कि शिकायतकर्ता को पहले ही सभी नियम एवं शर्तों की जानकारी दे दी गई थी और जमा राशि वापसी योग्य नहीं थी। दूसरी ओर जिंदल रीजेंसी होटल ने स्वयं को विवाद से अलग बताते हुए कहा कि उसने केवल कार्यक्रम के आयोजन हेतु स्थान उपलब्ध कराया था, पैकेज बेचने या राशि लेने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।
आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, ईमेल संवाद, व्हाट्सएप चैट और अन्य अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कथित शर्तों की जानकारी शिकायतकर्ता को पहले से दी गई थी। आयोग ने यह भी गौर किया कि कंपनी स्वयं अपने ईमेल में रिफंड प्रक्रिया जारी होने की बात स्वीकार कर चुकी थी। इसके बावजूद महीनों तक राशि वापस नहीं की गई।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के साथ यात्रा या अवकाश पैकेज इस उम्मीद से खरीदता है कि उसे बताए गए लाभ प्राप्त होंगे। यदि पैकेज बेचने के बाद उसकी मूल शर्तों में बदलाव कर दिया जाए और फिर उपभोक्ता की राशि भी वापस न की जाए तो यह स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण की श्रेणी में आता है। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा बल्कि लगातार पत्राचार, फोन कॉल और अनिश्चितता के कारण गंभीर मानसिक तनाव और उत्पीड़न भी झेलना पड़ा।
आयोग ने अपने आदेश में विंडसर हॉलिडेज को शिकायतकर्ता की 50 हजार रुपए की जमा राशि लौटाने, उस पर नियमानुसार ब्याज देने, मानसिक प्रताड़ना के लिए क्षतिपूर्ति 20,000/-रु तथा मुकदमेबाजी में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति 5,000/- रु. करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से महीनों तक चक्कर कटवाना और उचित मांग के बावजूद राशि नहीं लौटाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
क्या कहा आयोग ने
आयोग ने अपने निर्णय में माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि पैकेज की सभी शर्तें शिकायतकर्ता को पहले से स्पष्ट रूप से बताई गई थीं। इसके विपरीत कंपनी द्वारा भेजे गए ईमेल से यह प्रमाणित हुआ कि रिफंड प्रक्रिया स्वीकार की गई थी। इसके बावजूद राशि नहीं लौटाई गई। आयोग ने इसे सेवा में कमी, लापरवाही और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।



