डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (UPI) के इस दौर में भी देश में कैश की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन जल्द ही आपकी जेब में रखे कागज के नोटों की जगह मजबूत और टिकाऊ प्लास्टिक के नोट ले सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने प्लास्टिक नोटों के निर्माण के लिए पॉलिमर शीट की आपूर्ति हेतु ग्लोबल टेंडर (EOI) जारी कर दिया है। इसके साथ ही देश में प्लास्टिक करेंसी लाने की आधिकारिक प्रक्रिया एक बार फिर शुरू हो गई है।
क्या होते हैं प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट?
ये सामान्य प्लास्टिक नहीं, बल्कि एक बेहद मजबूत और विशेष प्रकार की प्लास्टिक फिल्म पर छापे जाते हैं।
· सुरक्षा चक्र: इन नोटों में एक ट्रांसपरेंट (पारदर्शी) विंडो होती है, जो इसकी सबसे बड़ी सुरक्षा विशेषता है।
· एंटी-काउंटरफ्रीट: इस खास तकनीक के कारण प्लास्टिक नोटों की हूबहू नकली कॉपी (जाली नोट) बनाना लगभग नामुमकिन होता है।
· स्वच्छता: कागज के मुकाबले इन पर बैक्टीरिया बहुत कम समय तक टिक पाते हैं।
14 साल पुराना है इतिहास, अब क्यों आई तेजी?
भारत में पॉलिमर नोटों का विचार साल 2009 में आया था। 2012 में 10 रुपये के 100 करोड़ नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी मिली थी और कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, शिमला व भुवनेश्वर जैसे अलग-अलग मौसम वाले शहरों को चुना गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। अब इसे दोबारा शुरू करने की मुख्य वजह नोटों की छपाई पर होने वाला भारी-भरकम खर्च और कागज के नोटों का जल्दी खराब होना है। वर्ष 2024-25 में ही करीब 23.8 अरब गंदे और कटे-फटे नोटों को चलन से बाहर करना पड़ा था।
RBI ने जारी के किया ग्लोबल टेंडर
भारतीय रिजर्व बैंक की नोट मुद्रण शाखा (Note Printing Branch) इस योजना अमलीजामा पहनाने के लिए पॉलिमर सबस्ट्रेट शीट्स के लिए एक ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है। ग्लोबल टेंडर के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बिडर्स को देश के लिए पॉलिमर सबस्ट्रेट बनाने और उसकी आपूर्ति करने के लिए आमंत्रित किया गया है। बोली जमा करने की आखिरी तारीख 18 अगस्त है। हालांकि RBI ने अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है।



