
महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में 55–60 किसान परिवारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 117 एकड़ भूमि की जांच एवं किसानों को जमीन वापस दिलाने की मांग मस्तुरी।
प्रमोद अवस्थी मस्तूरी
मस्तुरी। मस्तूरी विधानसभा के पाराघाट, बेलटुकरी एवं भनेसर क्षेत्र के किसानों की जमीन, रोजगार, पुनर्वास तथा शासकीय भूमि से जुड़े गंभीर मामलों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष श्री महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में किसानों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की।
तीनों पंचायतों से लगभग 55–60 किसान परिवारों के प्रतिनिधि एकजुट होकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर महोदय को अलग-अलग बिंदुओं से संबंधित ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच तथा किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की।
117 एकड़ कृषि भूमि का मामला
किसानों ने बताया कि ग्राम पाराघाट, बेलटुकरी एवं भनेसर क्षेत्र में वसुंधरा पावर प्लांट के लिए वर्ष 2003 से 2009 के बीच किसानों से लगभग 117 एकड़ कृषि भूमि नौकरी एवं पुनर्वास का आश्वासन देकर खरीदी गई थी। किसानों का आरोप है कि भूमि लेने के बाद लगभग 12–13 वर्षों तक प्लांट स्थापित नहीं किया गया, जिससे कृषि भूमि का उपयोग भी प्रभावित हुआ।
इसके बाद वर्ष 2022 में उक्त भूमि को दूसरे प्लांट/कंपनी को बेचने या हस्तांतरित किए जाने का मामला सामने आया। इससे किसानों में भारी नाराजगी एवं असंतोष है।
किसानों ने मांग की है कि प्रशासन यह जांच करे कि—
किसानों से जमीन किस उद्देश्य और किन शर्तों पर खरीदी गई थी।
पावर प्लांट की स्थापना के लिए क्या-क्या स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं।
लगभग 12–13 वर्षों तक प्लांट स्थापित क्यों नहीं किया गया।
वर्ष 2022 में जमीन को दूसरी कंपनी/प्लांट को किस आधार पर हस्तांतरित या बेचा गया।
भूमि हस्तांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
किसानों से किए गए रोजगार, पुनर्वास एवं अन्य वादों का पालन क्यों नहीं किया गया।
किसानों ने मांग की है कि यदि निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप भूमि का उपयोग नहीं हुआ है तो छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवं शासन की संबंधित औद्योगिक/भूमि नीति के अनुसार किसानों की भूमि वापस दिलाने तथा उचित क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाए।
शासकीय खसरा नंबर 170 में कथित अनियमितता की भी जांच की मांग
इसके साथ ही ग्राम पंचायत पाराघाट नीलागर नदी तक स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 170, रकबा 10.21 एकड़ को लेकर भी गंभीर शिकायत कलेक्टर के समक्ष रखी गई।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2022 में संबंधित पटवारी द्वारा उक्त खसरे का बंटाकन कर लगभग 2.94 एकड़ भूमि प्लांट के नाम दर्ज किए जाने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि गांव की घासभूमि/सामुदायिक उपयोग की भूमि रही है तथा वहां पूर्व में मनरेगा के तहत मिट्टी-मुरुम एवं सड़क निर्माण जैसे कार्य भी हुए हैं।
किसानों ने मांग की है कि खसरा नंबर 170 के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेख, बंटाकन, नामांतरण तथा भूमि को प्लांट के नाम दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए। यदि किसी प्रकार की नियमविरुद्ध कार्रवाई सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को सुरक्षित किया जाए।
राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड से प्रभावित 40 किसान परिवारों का रोजगार-पुनर्वास
वहीं राशि स्टील एवं पावर लिमिटेड, पाराघाट से प्रभावित लगभग 40 किसान परिवारों का रोजगार एवं पुनर्वास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
किसानों का कहना है कि उनकी भूमि लेने के समय नौकरी एवं पुनर्वास का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक सभी प्रभावित परिवारों को इसका समुचित लाभ नहीं मिला है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित कंपनी से किसानों के साथ किए गए समझौते एवं वादों का रिकॉर्ड लेकर जांच की जाए तथा पात्र प्रभावित परिवारों को नौकरी, पुनर्वास एवं अन्य वैधानिक लाभ दिलाए जाएं।
किसानों ने पुलिस-प्रशासन के दबाव की भी शिकायत की
ज्ञापन में किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी समस्याओं को लेकर प्लांट प्रबंधन से बातचीत करने जाने पर कुछ किसान परिवारों को पुलिस एवं प्रशासन के माध्यम से डराने-धमकाने और दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।
किसानों ने इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने तथा शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले किसानों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
महेंद्र गंगोत्री ने कहा— किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि किसानों की जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। यदि किसानों से जिस उद्देश्य के लिए जमीन ली गई थी, उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई और बाद में जमीन को दूसरे प्लांट या कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि 55–60 किसान परिवारों का तीनों पंचायतों से एकजुट होकर जिला प्रशासन तक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि यह गंभीर और व्यापक जनहित का विषय है। प्रशासन को किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दस्तावेजों एवं राजस्व अभिलेखों की जांच करनी चाहिए और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
गंगोत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। किसानों को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मंच पर उनकी आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार भूमि वापसी/उचित क्षतिपूर्ति, रोजगार एवं पुनर्वास का लाभ दिलाने की दिशा में तत्काल कार्रवाई की जाए।
प्रमुख मांग:
“किसानों की जमीन का न्यायपूर्ण समाधान हो, शासकीय भूमि सुरक्षित रहे और प्रभावित परिवारों को उनका हक—जमीन, रोजगार, पुनर्वास एवं उचित क्षतिपूर्ति मिले।



