सोनपुर और लिप्ती के शासकीय स्कूलों को मिलेगा सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित परिसर
रायगढ़, जिले के खनिज प्रभावित क्षेत्रों में शैक्षणिक अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से विकासखंड धरमजयगढ़ के सोनपुर और लिप्ती स्थित दो शासकीय स्कूलों में अहाता निर्माण के लिए कुल 30 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। दोनों स्कूलों के लिए 15-15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
स्वीकृति के तहत ग्राम पंचायत सोनपुर की माध्यमिक शाला सोनपुर के परिसर में अहाता निर्माण के लिए 15 लाख रुपये तथा ग्राम पंचायत लिप्ती के हाई स्कूल लिप्ती में अहाता निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है। दोनों कार्य शिक्षा के अंतर्गत खेल अधोसंरचना की उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों में शामिल हैं। अहाता निर्माण से स्कूल परिसरों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही विद्यार्थियों को खेलकूद एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित परिसर उपलब्ध हो सकेगा। दोनों कार्यों की कार्यपालन एजेंसी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत धरमजयगढ़ को बनाया गया है। प्रशासनिक स्वीकृति आदेश के अनुसार प्रत्येक कार्य को पूर्ण करने के लिए 365 दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति आदेश में विभिन्न शर्तें निर्धारित की गई हैं। निर्माण शुरू होने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य पूर्ण होने के बाद चारों कोणों से ली गई तस्वीरों को अंतिम भुगतान मांग पत्र के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। कार्यस्थल पर स्थायी सूचना फलक भी लगाया जाएगा, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की तिथि तथा डीएमएफ का लोगो प्रदर्शित करना होगा। निर्माण कार्य केवल निर्विवादित शासकीय भूमि पर ही किया जाएगा। खसरे में निजी भूमि दर्ज होने की स्थिति में वहां निर्माण नहीं किया जाएगा। कार्य एजेंसी को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति रिपोर्ट जिला खनिज संस्थान न्यास को भेजनी होगी। प्रशासन ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप कार्य नहीं पाए जाने पर आवश्यक सुधार कार्य में होने वाला व्यय संबंधित कार्य एजेंसी को स्वयं वहन करना होगा।



