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श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक ज्ञान से सुखद जीवन की ओर बढ़ने का संदेश

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गीता केवल ग्रंथ नहीं, श्रेष्ठ जीवन जीने की कला है : बी.के. शशिप्रभा
सात दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ का प्रभु अनुराग भवन में शुभारंभ

मस्तूरी । प्रभु अनुराग भवन, भाठापारा, कोटमी सुनार में 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित “ *श्रीमद्भगवद्गीता—गीता का सार, सुखद जीवन का आधार” सात दिवसीय आध्यात्मिक* कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस पर गीता सार प्रवक्ता एवं राजयोग शिक्षिका बी.के. शशिप्रभा दीदी, बिलासपुर ने श्रीमद्भगवद्गीता के आध्यात्मिक रहस्यों को सरल एवं सहज रूप में समझाते हुए सुखद जीवन जीने की कला पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि श्रेष्ठ कर्म करने, आत्म-जागरूक बनने और जीवन में शांति एवं संतुलन प्राप्त करने की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान है। गीता के संदेश को जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाकर मनुष्य अपने विचारों, कर्मों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

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प्रथम दिवस के अवसर पर कर्म, अकर्म एवं विकर्म का बोध तथा कर्मयोग की महत्ता को समझाया गया। उन्होंने बताया कि अपने कर्मों के प्रति जागरूकता और श्रेष्ठ चिंतन जीवन को सुखद एवं सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से मन को शांत एवं एकाग्र करने की विधि पर भी प्रकाश डाला गया।

छह दिनों में इन विषयों पर होगा विशेष मार्गदर्शन

सात दिवसीय कार्यक्रम के आगामी दिनों में विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर क्रमशः मार्गदर्शन दिया जाएगा। इनमें आध्यात्मिक रहस्यों का प्रैक्टिकल ज्ञान एवं ज्ञानयोग, कर्म-अकर्म-विकर्म का बोध एवं कर्मयोग, परमात्मा का बोध एवं दिव्य अवतरण, विभूति योग, सृष्टि का अनादि सत्य एवं कल्पवृक्ष कथा, राजयोग एवं भक्ति योग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए यह समझाया जाएगा कि आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक चिंतन और राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति अपने जीवन में शांति, प्रसन्नता, आत्मविश्वास एवं संतुलन का अनुभव कर सकता हैl

श्राद्ध मास और पितृ तर्पण की आध्यात्मिक भावना का आध्यात्मिक रहस्य

विशेष रूप से श्राद्ध मास और पितृ तर्पण की आध्यात्मिक भावना को समझाते हुए यह बताया जाएगा कि पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता, शुभ भावना और आत्मिक स्मृति का हमारे जीवन में क्या महत्व है। साथ ही इन परंपराओं के पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को सहज एवं व्यावहारिक रूप में समझाया जाएगा।

कार्यक्रम 4 से 10 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक प्रभु अनुराग भवन, भाठापारा, कोटमी सुनार में आयोजित किया जा रहा है। कथावका आयोजन ब्रह्माकुमारीज़ कोटमी सुनार, बिलासपुर द्वारा किया जा रहा है।

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