गीता ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस में तेरा कन्याओं ने लिया मांसाहार को त्यागने का अटूट संकल्प
मस्तूरी।। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा प्रभु अनुराग भवन, भाटापारा, कोटमी सुनार में आयोजित सात दिवसीय “ श्रीमद्भगवद्गीता का सार—सुखद जीवन का आधार” ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस राजयोग शिक्षिका एवं गीता सार प्रवक्ता ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने गीता के आध्यात्मिक रहस्यों और नवरात्रि महात्म्य पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के नौ दिनों में जीवहत्या एवं मांसाहार का त्याग करने की भावना जागृत होती है, लेकिन सच्ची आध्यात्मिक उन्नति तभी है, जब जीवों के प्रति करुणा जीवनभर का संस्कार बने। गीता ज्ञान हमें दया, पवित्रता, आत्मसंयम और श्रेष्ठ कर्मों की प्रेरणा देता है। नवरात्रि का वास्तविक संदेश है—अपने भीतर की आसुरी प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर दैवी गुणों को धारण करना।
तेरा कन्याओं ने लिया मांसाहार को त्यागने का संकल्प
समापन समारोह में सभी ने अपनी एक-एक कमी एवं अवगुण को त्यागने का संकल्प लेकर उसकी प्रतीकात्मक आहुति हवन कुंड में ‘स्वाहा’ के साथ अर्पित की। परमात्मा को साक्षी मानकर सभी ने प्रतिज्ञा की कि वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँगे और त्यागे गए अवगुणों को दोबारा जीवन में स्थान नहीं देंगे। यह आत्मपरिवर्तन की अनूठी पहल ज्ञान यज्ञ की भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी पूर्णाहुति बनी।
अंत में संदेश दिया गया कि अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगना, दूसरों को क्षमा करना और स्वयं में सुधार लाना ही सच्ची साधना है। जब मन के विकारों की आहुति होती है, तभी जीवन में दैवी गुणों का उदय होता है।



