पुनर्वास नीति-2025 के तहत आवासीय भूमि के बदले 4 लाख और 8 लाख रुपये की सहायता देने की मांग, कलेक्टर कार्यालय में सौंपा आवेदन
बीजापुर@रामचन्द्रम एरोला- नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोने वाले बीजापुर जिले के पीड़ित परिवारों ने अब अपने अधिकारों और पुनर्वास की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। नक्सली हमलों में पति, पिता, भाई और बेटों को खोने वाले परिवारों का कहना है कि लंबे समय से वे सहायता और पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। इसी को लेकर नक्सल पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन सौंपा है।
पीड़ित परिवारों ने शासन की पुनर्वास नीति का हवाला देते हुए पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नक्सली हिंसा के कारण कई परिवारों को अपने मूल गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर रहना पड़ रहा है। ऐसे में उनके सामने आवास, आजीविका और परिवार के भरण-पोषण जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
पुनर्वास नीति-2025 के तहत सहायता की मांग
पीड़ित परिवारों ने अपने आवेदन में छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 की कंडिका 4.2.1 का उल्लेख करते हुए कहा है कि पात्र परिवारों को शहरी क्षेत्र में 8 लाख रुपये तथा ग्रामीण क्षेत्र में 4 लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है।
आवेदकों की मांग है कि नीति के तहत पात्र परिवारों को इसका लाभ जल्द से जल्द दिया जाए। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए शासन की ओर से प्रभावी सहायता मिलनी चाहिए। केवल नीति और घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय पात्र परिवारों तक सहायता पहुंचाना जरूरी है।
राजनांदगांव का उदाहरण देकर उठाए सवाल
नक्सल पीड़ित परिवारों ने अपने आवेदन में राजनांदगांव जिले में पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के लिए की गई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए बीजापुर प्रशासन से सवाल उठाए हैं। आवेदकों के अनुसार, राजनांदगांव में पुनर्वास समिति ने भूमि के बदले पीड़ितों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब प्रदेश में एक ही पुनर्वास नीति लागू है, तो बीजापुर जिले के पात्र परिवारों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके मामलों पर गंभीरता से विचार करते हुए सहायता राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
सुरक्षित आवास और सम्मानजनक जीवन की दरकार
पीड़ित परिवारों का कहना है कि नक्सली हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए सुरक्षित आवासीय भूमि की व्यवस्था बेहद जरूरी है। कई परिवारों के सामने स्थायी रूप से रहने की जगह और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि शासन की ओर से सुरक्षित आवासीय भूमि उपलब्ध कराना संभव नहीं है, तो संबंधित नीति के तहत पात्रता के अनुसार निर्धारित सहायता राशि प्रदान की जाए, ताकि वे अपने परिवार के लिए रहने की व्यवस्था कर सकें।
नक्सल पीड़ित परिवार संघ के नेतृत्व में सौंपा आवेदन
नक्सल पीड़ित परिवार संघ के प्रदेश नेतृत्वकर्ता धीरेन्द्र साहू के नेतृत्व में अनिल कुमार, उमंग पुनेम, योगेश्वरी पगाड़ी सहित अन्य पीड़ित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर हस्ताक्षरयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन की प्रति कलेक्टर कार्यालय की आवक-जावक शाखा में सौंपी गई है।
परिवारों ने प्रशासन से जल्द निर्णय लेने और पात्र हितग्राहियों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास का लाभ दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि वे भय और असुरक्षा के माहौल से निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सुरक्षित आवासीय भूमि उपलब्ध कराने अथवा नियमानुसार 4 लाख और 8 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की मांग दोहराई है।
अब इस मामले में जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर पीड़ित परिवारों की नजरें टिकी हैं। देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेता है और पात्र परिवारों को पुनर्वास नीति का लाभ दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



