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राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी बनी वैज्ञानिक खोजों और आधुनिक तकनीक का आकर्षण

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सूरजपुर में कर्क रेखा पर बनेगा एस्ट्रो साइंस सेंटर, शून्य छाया दिवस का समझ सकेंगे रहस्य
रागी, कोदो और बाजरा में कैंसर रोधी गुणों की खोज पर अनुसंधान, जैव-सक्रिय तत्वों का प्रदर्शन
नवा रायपुर में प्रस्तावित साइंस सिटी, एआई से साइबर सुरक्षा और ड्रोन से नगरीय सर्वेक्षण का भी प्रदर्शन
रायपुर,

रायपुर : राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी बनी वैज्ञानिक खोजों और आधुनिक तकनीक का आकर्षण

रायपुर : राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी बनी वैज्ञानिक खोजों और आधुनिक तकनीक का आकर्षण

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रायपुर : राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी बनी वैज्ञानिक खोजों और आधुनिक तकनीक का आकर्षण

राज्योत्सव की विज्ञान प्रदर्शनी आम नागरिकों को जीवन से जोड़ने के साथ वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ की नई संभावनाओं को सामने ला रही है। क्या कभी ऐसा हो सकता है कि दोपहर में सूरज सिर के ठीक ऊपर हो और आपकी परछाई ही गायब हो जाए? क्या रागी, कोदो और बाजरा जैसे मोटे अनाज भविष्य में कैंसर रोधी दवाओं के विकास का आधार बन सकते हैं? इन रोचक सवालों के वैज्ञानिक जवाब और भविष्य की संभावनाएं नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रदर्शनी में देखने को मिल रही हैं। प्रदर्शनी में खगोल विज्ञान, औषधीय अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और ग्रामीण विकास से जुड़े नवाचारों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

कर्क रेखा पर बनेगा एस्ट्रो साइंस सेंटर, जहां समझ सकेंगे शून्य छाया दिवस का रहस्य

प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण ‘जीरो शैडो डे’ अर्थात शून्य छाया दिवस का वैज्ञानिक प्रदर्शन है। सूरजपुर जिले की प्रतापपुर तहसील के ग्राम मायापुर में कर्क रेखा पर एस्ट्रो साइंस सेंटर प्रस्तावित है। शून्य छाया दिवस वह विशेष खगोलीय घटना है, जब स्थानीय सौर दोपहर में सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है और किसी सीधी खड़ी वस्तु की छाया लगभग शून्य हो जाती है। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में इस घटना की संभावित तिथियों और समय की जानकारी दी गई है। प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों और नागरिकों को खगोल विज्ञान तथा पृथ्वी एवं सूर्य की स्थिति से जुड़ी वैज्ञानिक घटनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।

चार जिलों में प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्रों से ग्रामीण विकास को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा बिलासपुर के भड़हा, कबीरधाम के ठाठापुर, धमतरी के शिवि और बलरामपुर के सनावर में संचालित प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्रों की गतिविधियां भी प्रदर्शित की गई हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को उन्नत कृषि तकनीक, ड्रोन, रोबोटिक्स, जैविक खाद निर्माण और मोबाइल बैंकिंग जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है और प्रौद्योगिकी प्रदान कर इन ग्रामों को प्रौद्योगिकी ग्राम के रूप में मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मिलेट्स में कैंसर रोधी गुणों की खोज, औषधीय अनुसंधान की नई संभावनाएं

प्रदर्शनी का अन्य विशेष आकर्षण मिलेट्स जैसे रागी, कोदो और बाजरा आदि में मौजूद जैव-सक्रिय तत्वों पर किया जा रहा अनुसंधान है। इन अनाजों के कैंसर रोधी गुणों के अध्ययन के साथ इनके अर्क और सक्रिय घटकों की पहचान से संबंधित प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया है।

रागी और कोदो के अर्क की प्रारंभिक फाइटोकेमिकल स्क्रीनिंग में एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनॉइड्स, फिनोलिक यौगिक, टैनिन्स और फाइटोस्टेरॉल्स सहित सात प्रकार के घटकों के सकारात्मक परिणाम दर्शाए गए हैं। इन तत्वों  के वैज्ञानिक अनुसंधान से कैंसर रोधी औषधियों के विकास की संभावनाएं हैं। इन जैव-सक्रिय तत्वों से कैंसर रोधी दवाइयां बनाए जा सकेंगे। इन जैव-सक्रिय तत्वों का परीक्षण भी किया जा रहा है।

नवा रायपुर में प्रस्तावित साइंस सिटी में दिखेगी भविष्य की तकनीक

प्रदर्शनी में नवा रायपुर में प्रस्तावित साइंस सिटी की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है। इसमें जलवायु परिवर्तन, खनिजों की दुनिया, अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर आधारित चार प्रमुख दीर्घाएं प्रस्तावित हैं। इनमें सौरमंडल, अंतरिक्ष अन्वेषण, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट सिटी जैसी आधुनिक अवधारणाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।

एआई गैलरी से साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूकता, ड्रोन से अवैध निर्माण की पहचान

छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में प्रस्तावित ‘एआई-अल्टर्ड आइडेंटिटी’ गैलरी का भी प्रदर्शन किया गया है। इसमें डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग, चेहरे की डिजिटल नकल, बायोमेट्रिक सुरक्षा और अन्य साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

प्रदर्शनी में ड्रोन आधारित त्रिस्तरीय स्थलाकृतिक सर्वेक्षण तकनीक भी दिखाई गई है। इसके माध्यम से जमीन की बनावट, सड़कों, भवनों और अन्य अधोसंरचनाओं का सर्वेक्षण किया जा सकता है। यह तकनीक नगरीय निकायों को अवैध निर्माण की पहचान, संपत्तियों के सत्यापन और राजस्व संग्रहण में सहायता प्रदान कर सकती है। भिलाई में इस तकनीक से सर्वेक्षण किया जा चुका है। प्रदर्शनी में ट्रिनिटी एफ-90 और अस्त्रअयम दो ड्रोन प्रदर्शित किए गए हैं। इस तकनीकी पहल को आईआईटी भिलाई के साथ एमओयू के अंतर्गत विकसित किया गया है।

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