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मुख्यमंत्री की ‘विष्णु की पाती’ से भावुक हुईं लखपति दीदी सगो बाई तेता

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कहा—मेरे संघर्ष और मेहनत को मिली पहचान

उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कांकेर ब्लाक के ग्राम गढ़पिछवाड़ी निवासी लखपति दीदी श्रीमती सगो बाई तेता को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का व्यक्तिगत पत्र ‘विष्णु की पाती’ मिला है। मुख्यमंत्री द्वारा उनकी मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों की सराहना किए जाने से सगो बाई और उनका परिवार बेहद प्रसन्न एवं भावुक है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पत्र में “प्रिय बहन सगो बाई जी” संबोधित करते हुए उन्हें और उनके परिवार को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सगो बाई के संघर्षपूर्ण जीवन और अपने परिश्रम से परिवार को संवारने के साथ ही अन्य महिलाओं को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की है।

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मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि जीवन में अनेक कठिनाइयों के बावजूद सगो बाई ने मेहनत करने और नए-नए कार्य सीखने का हौसला बनाए रखा। सिलाई से लेकर भोजन तैयार करने और अन्य आजीविका गतिविधियों तक विभिन्न हुनर सीखने की उनकी लगन की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी के रूप में मिली उनकी पहचान वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने अपने परिश्रम से परिवार को मजबूत बनाने, बच्चों को शिक्षित करने और छोटी बेटी को नर्सिंग की पढ़ाई के माध्यम से बेहतर भविष्य देने के उनके प्रयासों की भी प्रशंसा की है। पत्र में बिहान योजना से मिले सहयोग को अपनत्व के साथ याद करने और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

गायत्री स्व-सहायता समूह से शुरू हुआ सगो बाई का सफर आज अन्य महिलाओं और परिवारों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने तथा अपने अनुभवों को दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाने के उनके प्रयासों की मुख्यमंत्री ने सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ने का यही भाव हमारे गांवों की वास्तविक ताकत है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लखपति दीदी संकल्प का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि महिलाओं की ऐसी सक्रिय भागीदारी वर्ष 2047 तक विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत करेगी।

सगो बाई तेता की सफलता

ग्राम गढ़पिछवाड़ी निवासी श्रीमती सगो बाई तेता पहले मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थीं, जिससे परिवार की आय सीमित थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ गायत्री स्व-सहायता समूह का गठन किया।

बिहान के तहत मिली 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और समूह से प्राप्त ऋण के माध्यम से उन्होंने अपने खेत में बोरवेल स्थापित कराया। इससे अब वे खरीफ के साथ रबी फसल भी लेने लगी हैं।

खेती के अलावा सगो बाई मशरूम उत्पादन, छेना निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करने, कॉटन तकिया निर्माण, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ा विक्रय जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ी हैं। इन गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इसी आय के माध्यम से उन्होंने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ अपने बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए प्रयास किए हैं। वे महतारी वंदन योजना का लाभ भी प्राप्त कर रही हैं।

मुख्यमंत्री के पत्र से मिला नया उत्साह

मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत पत्र मिलने पर भावुक सगो बाई तेता ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि प्रदेश के मुखिया उनके संघर्ष और काम के बारे में जानेंगे तथा स्वयं उन्हें पत्र लिखेंगे।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘विष्णु की पाती’ उनके और उनके परिवार के लिए सम्मान और गर्व का विषय है। इस पत्र से उन्हें आगे भी बेहतर कार्य करने तथा अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का नया उत्साह मिला है।

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