संदीप सिंह @रायगढ़ । प्रदेश में ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से पहले रायगढ़ जिला भाजपा में परिवर्तन भाजपाइयों में नई उम्मीदें जगा गया कि इस बार भाजपा रायगढ़ नगर निगम की सत्ता पर काबिज होने में सफल होगी । नए जिला अध्यक्ष अरुणधर दीवान ग्रास रूट लेवल के नेता के तौर पर जाने जाते हैं जिनकी कार्यकर्ताओं के बीच पैठ अच्छी मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है, कि रायगढ़ जिले की राजनीति की नब्ज को भी वे खूब समझते हैं , पर अभी रायगढ़ नगर निगम के वार्ड प्रत्याशियों के नाम घोषित होने पर आपसी विवाद सामने आने लगा है। विशेषकर वार्ड नंबर 32 से जिस तरह नरेश पटेल को भाजपा की ओर से प्रत्याशी घोषित किया गया है वह जिला भाजपा नेतृत्व के निर्णय पर कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नरेश पटेल भाजपा के टिकट पर वार्ड नंबर 32 से हार चुके हैं बल्कि एक बार निर्दलीय लड़ कर भी हार का सेहरा अपने सिर पर बांध चुके हैं । इस बार भी जिला भाजपा ने क्या सोचकर उन पर दांव खेला है यह स्थानीय राजनीति के जानकार ही बता पाएंगे। आपको बता दें कि नरेश पटेल एक बार 2014 और दूसरी बार 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी के हाथों बुरी तरह पराजित हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि भाजपा नेतृत्व उन पर इतना मेहरबान क्यों है ! जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 32 से नेता जितेंद्र निषाद और पुकराम का नाम भी जिला आलाकमान के पास भेजा गया था , पर उनके नाम पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया । इसे स्थानीय भाजपाइयों के बीच हैरत का विषय माना जा रहा है ।
वहीं कांग्रेस से रत्थू जायसवाल जो दो बार के पार्षद रह चुके हैं, पर दांव लगाया है। ऐसे में अब देखना होगा कि जनता इस बार किसे जीत का सेहरा सौंपती है। जबकि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को कैसे मनाती है। दोनों पार्टियों को इस बात को ध्यान रखकर चुनावी मैदान में जाना चाहिए कि स्थानीय चुनावों में सरकार, पार्टी और विचारधारा से परे व्यक्ति विशेष की छवि मुख्य भूमिका निभाती है।



