Home Blog राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 बना विवाद का केंद्र

राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 बना विवाद का केंद्र

0

पटवारी संघ बनाम चयनित अभ्यर्थी: मामला विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचा, शासन की भूमिका पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 अब विवादों के घेरे में आ गई है। एक ओर जहां चयनित अभ्यर्थी न्यायालय के आदेशों के बावजूद अब तक प्रशिक्षण से वंचित हैं, वहीं दूसरी ओर पटवारी संघ के कुछ पदाधिकारी परीक्षा को निरस्त कराने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने शासन, न्यायपालिका और प्रशासनिक निष्पक्षता की साख को कटघरे में ला खड़ा किया है।

Ro.No - 13759/40

📌 विवाद की पृष्ठभूमि

वर्ष 2014 से पहले तक पटवारियों को वरिष्ठता के आधार पर राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी जाती थी। लेकिन जब यह देखा गया कि अधिकांश पटवारी प्रमोशन नहीं ले रहे हैं और इससे पद रिक्त रह जाते हैं, तब छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली 2014 के अंतर्गत परीक्षा आधारित पदोन्नति प्रणाली लागू की गई।

इसी नियम के तहत 2016, 2017, 2018 और फिर 2024 में परीक्षा आयोजित की गई। पहले तीनों परीक्षाएं निर्विवाद रूप से सम्पन्न हुईं, लेकिन 2024 की परीक्षा में वरिष्ठ पटवारियों का चयन न हो पाने के कारण विवाद शुरू हो गया।

🗓️ दिनांकवार घटनाक्रम

07 जनवरी 2024: विभागीय परीक्षा रायपुर में सम्पन्न

16 जनवरी 2024: मॉडल उत्तर जारी

29 जनवरी 2024: पटवारी संघ ने परीक्षा संचालन पर आपत्ति दर्ज की

29 फरवरी 2024: परीक्षा परिणाम घोषित

11 मार्च 2024: 7 अचयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका (WPS 1832/2024) दायर की

16 अप्रैल 2024: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए परीक्षा को वैध ठहराया

23 अगस्त 2024: शासन ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की

02 दिसंबर 2024: समिति ने अपनी रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी

14 जनवरी 2025: हाईकोर्ट ने चयनितों को 15 दिनों में प्रशिक्षण भेजने का आदेश दिया (WPS 7889/2024)

31 जनवरी 2025: 134 चयनित अभ्यर्थियों ने सामूहिक याचिका (WPS 1205/1206) दाखिल की

04 मार्च 2025: शासन ने EOW/ACB से नई जांच का आदेश जारी किया

❗ जांच समिति की रिपोर्ट पर सवाल

चयनित अभ्यर्थियों ने उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट को एकतरफा और तथ्यहीन बताते हुए इसे न्यायिक आदेशों की अवहेलना कहा है। प्रमुख आपत्तियां:

सुनवाई का अवसर नहीं मिला

बैठक व्यवस्था, अनुक्रमांक रैंडमाइजेशन, केंद्राध्यक्षों के बयान की जांच नहीं

22 अभ्यर्थियों को बिना नाम दिए “रिश्तेदार” कहकर बदनाम किया गया

OMR शीट की जानकारी पूर्व परीक्षाओं जैसी ही थी, कोई नई प्रक्रिया नहीं थी

केवल असफल अभ्यर्थियों की शिकायतों को आधार बनाया गया

⚖️ उच्च न्यायालय की स्पष्ट टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा – “परीक्षा में सम्मिलित होने के बाद कोई अभ्यर्थी उसकी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठा सकता।”
राज्य सरकार ने भी अदालत में कहा था कि परीक्षा नियमबद्ध और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की गई थी, और सभी को समान अवसर मिला।

🏛️ शासन की चुप्पी और देरी पर प्रश्नचिह्न

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चयनित अभ्यर्थियों को अब तक प्रशिक्षण में नहीं भेजा गया है। जब कोर्ट ने 15 दिनों में निर्णय लेने को कहा, तो शासन ने जांच को गृह विभाग और फिर ACB/EOW को सौंप दिया। चयनित अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह सब केवल परीक्षा को निरस्त करने और वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन देने के लिए किया जा रहा है।

👥 134 चयनितों की एकजुटता – न्याय की मांग

अब तक लगभग 134 चयनित अभ्यर्थी न्यायालय की शरण में हैं। उनका कहना है कि यदि यह परीक्षा निरस्त होती है तो यह केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर आघात होगा।

🔚 निष्कर्ष

राजस्व निरीक्षक विभागीय परीक्षा 2024 अब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता, न्यायिक आदेशों के सम्मान, और प्रशासन की पारदर्शिता का मसला बन चुकी है। क्या चयनित अभ्यर्थियों को उनका हक मिलेगा या वरिष्ठता के नाम पर नियमों को फिर बदला जाएगा – यह देखना अब शेष है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here