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दीवारों में नारा लेखन के साथ विभिन्न गतिविधियों का किया जा रहा आयोजन

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Various activities are being organised along with slogan writing on the walls.

प्रशासन द्वारा जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा जागरूकता अभियान

Ro.No - 13759/40

रायगढ़ / जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिले में जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री एल.आर.कच्छप ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले को 31 मार्च 2029 से पूर्व पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाना है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों का एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों एवं बाल विवाह मुक्त छ.ग. अभियान के लक्ष्यों को विस्तार से बताया गया है। साथ ही बाल विवाह रोकने और इसे समाप्त करने के लिए शपथ दिलाई गई। कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, जिला बाल संरक्षण ईकाई के कर्मचारी एवं चाइल्ड हेल्प लाइन के प्रतिनिधि उपस्थित हुए।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए आंगनबाडी कार्यकर्ता, मिशन शक्ति, चाइल्ड हेल्प लाईन 1098 के टीम द्वारा जन समुदाय के मध्य, स्कूलों, विभागीय बैठकों में प्रचार प्रसार किया जा रहा है। जागस्कता लाने के उद्देश्य से नारा लेखन कराया जा रहा है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार शासन द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाईजर एवं प्रत्येक ग्राम पंचायत के सचिव को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अधिसूचित किया गया है। बाल विवाह संबंधी सूचना इन्हें दी जा सकती है। इनके अतिरिक्त चाइल्ड हेल्प लाईन 1098 पर भी बाल विवाह होने की सूचना दी जा सकती है। सूचना प्रदाता की जानकारी गोपनीय रखी जाती है।

जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने हेतु ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित ग्राम सभाओं में बाल विवाह निषेध प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए जा रहे हैं तथा ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त करने का संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बालिकाओं के विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे कम आयु में विवाह कराने या सहयोग करने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत एक लाख का जुर्माना एवं दो वर्ष तक की कठोर कारावास या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। यदि किसी नाबालिग की जबरन शादी कराई जाती है, तो इसमें शामिल पुरोहित और परिजन दोनों अपराध की श्रेणी में आएंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

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