Home Blog नक्सल छाया के बीच उम्मीद की फसल,किसान कोयना ने धान बेचकर खरीदा...

नक्सल छाया के बीच उम्मीद की फसल,किसान कोयना ने धान बेचकर खरीदा ट्रैक्टर

0

Amidst the shadow of Naxalism, a harvest of hope: Farmer Koyna buys a tractor after selling his paddy crop.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की नई रफ़्तार

Ro.No - 13759/40

रायपुर,  बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, जहाँ अब गोलियों की गूँज की जगह ट्रैक्टरों की आवाज़ और फूलों-फलों की महक फैल रही है, क्योंकि किसान आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं से जुड़कर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं, जिससे क्षेत्र में खुशहाली आ रही है।

बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में अब गोलियों की गूँज नहीं, बल्कि खेतों में दौड़ते ट्रैक्टरों की आवाज़ विकास की नई इबारत लिख रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ (लक्ष्य: 31 मार्च 2026) के संकल्प और सुदृढ़ कृषि नीतियों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। सुकमा के ग्राम चिपुरपाल के किसान कोयना बघेल की कहानी इस बदलाव का जीवंत प्रमाण बन गई है।

48 घंटे में भुगतान: सुशासन का सीधा लाभ

छिंदगढ़ जनपद के किसान कोयना बघेल ने जैसे ही बिरसठपाल केंद्र में 50 क्विंटल धान बेचा, 3100 रुपया प्रति क्विंटल की दर से उनकी मेहनत की पूरी कमाई मात्र 48 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में पहुँच गई। बिचौलियों की समाप्ति और समयबद्ध भुगतान ने किसान को इतना सशक्त बनाया कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी से नया ‘मैसी फर्गुसन’ ट्रैक्टर ट्राली के साथ खरीद लिया।

हितग्राही श्री कोयना ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी

हितग्राही श्री कोयना बघेल ने बताया कि शासन की 31 सौ रुपये में धान खरीदी व्यवस्था बहुत अच्छी है। इससे हम जैसे छोटे मध्यमवर्गीय किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है। समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को दिल से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

बहुआयामी विकास: खेती भी और स्वरोजगार भी

यह बदलाव केवल खेती तक सीमित नहीं है। ट्रैक्टर से कृषि कार्य तेज़ हुए हैं, वहीं किसान पीएम आवास निर्माण में ईंट-बालू की आपूर्ति कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे राजूराम नाग जैसे किसान आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

किसान की सफलता पर कलेक्टर का भरोसा

सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में किसान की यह सफलता मेहनत, धैर्य और सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन का प्रमाण है।
छत्तीसगढ सरकार किसानों को आधुनिक कृषि संसाधनों और योजनाओं से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और पूरी सुविधा मिले।

प्रशासनिक मुस्तैदी: कलेक्टर की सीधी निगरानी

कलेक्टर के नेतृत्व में सुकमा प्रशासन ने धान खरीदी केंद्रों को ‘सुविधा केंद्रों’ में बदल दिया है। जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता के कारण किसानों को टोकन से लेकर भुगतान तक कहीं भटकना नहीं पड़ रहा है। कलेक्टर के अनुसार, शासन-प्रशासन और किसानों का समन्वय ही ज़मीनी बदलाव की असली चाबी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर जैसे इलाके, जो कभी नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाने जाते थे, अब कृषि क्रांति देख रहे हैं, जहाँ कृषि विभाग की योजनाओं, जल संरक्षण और तकनीकी सहायता ने खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here