The district court acquitted the accused; Married man raped his ‘live-in’ partner, court gave verdict on this basis
मध्य प्रदेश की इंदौर जिला अदालत ने 34 वर्षीय एक विवाहित व्यक्ति को अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ दुष्कर्म करने, गर्भपात के लिए मजबूर करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को बरी कर दिया है। एक अभियोजन अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
25 अप्रैल के इस फैसले में, अदालत ने कहा कि एक समझौता था जिसके तहत 29 वर्षीय महिला ने एक ऐसी व्यवस्था के लिए सहमति दी थी जिसमें 29 वर्षीय महिला ने इस बात पर सहमति जताई थी कि पुरुष सात दिन उसके साथ और सात दिन अपनी पत्नी के साथ बारी-बारी से रहेगा।
आरोपी व्यक्ति को साल 2021 में किया गया था गिरफ्तार
अधिकारी ने बताया कि महिला ने इस व्यक्ति के खिलाफ शहर के भंवरकुआं पुलिस थाने में 27 जुलाई 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया, जबरन गोलियां खिलाकर उसका गर्भपात कराया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। आरोपी व्यक्ति को 15 अगस्त, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। 2 मार्च, 2022 को जमानत पर रिहा होने से पहले उसने 200 दिन जेल में बिताए।
एग्रीमेंट की वजह से अदालत ने किया आरोपी को किया दोषमुक्त
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जयदीप सिंह ने तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद इस व्यक्ति को भारतीय दंड विधान की धारा 376 (दो) (एन) (महिला से बार-बार दुष्कर्म), धारा 313 (स्त्री की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराना) और धारा 506 (धमकाना) के आरोपों से 25 अप्रैल को बरी कर दिया।
समझौते में कबूल की शादीशुदा होने की बात
अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि प्राथमिकी दर्ज कराने वाली महिला ने इस व्यक्ति के साथ 15 जून 2021 को बाकायदा समझौता किया था जिसमें साफ लिखा गया था कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और वह एक हफ्ते उसके साथ और एक हफ्ते अपनी पत्नी के साथ बारी-बारी से रहेगा। समझौते में यह भी कहा गया कि महिला और पुरुष पिछले दो साल से रिलेशनशिप में थे।
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
अपर सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस अनुबंध से स्पष्ट है कि ‘लिव-इन’ संबंध (किसी जोड़े का बिना शादी के साथ रहना) में रहने के दौरान महिला और इस व्यक्ति ने आपसी सहमति से शारीरिक रिश्ते बनाए थे और यह शख्स पहले से शादीशुदा होने के कारण उसके साथ विवाह करने की स्थिति में नहीं था. अदालत ने इस व्यक्ति को आरोपों से बरी करते हुए कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में इस व्यक्ति को बलात्कार और जबरन गर्भपात का दोषी नहीं ठहराया जा सकता. जहां तक (शिकायतकर्ता महिला को) जान से मारने की धमकी दिए जाने का संबंध है, इस सिलसिले में रिकॉर्ड पर विश्वसनीय सबूत मौजूद नहीं हैं.”
आपको बता दें कि महिला के दर्ज कराए गए मामले में इस व्यक्ति को 15 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया गया था और दो मार्च 2022 को जमानत पर रिहा होने से पहले वह 200 दिन तक न्यायिक हिरासत के तहत जेल में रहा था.
प्रेमिका ने 3 साल पहले दर्ज कराया था मामला
सूत्रों के अनुसार महिला की शिकायत के आधार पर 27 जुलाई 2021 को इंदौर के भवरकुआं पुलिस स्टेशन में उस व्यक्ति के खिलाफ शादी के बहाने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म करने, गर्भपात कराने के लिए मजबूर करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. युवक को 15 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया गया था. 2 मार्च 2022 को जमानत पर रिहा होने से पहले उसने 200 दिन जेल में बिताए.
सारे तथ्यों को सुनने के बाद किया बरी
इंदौर जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जयदीप सिंह ने तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद युवक को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (एन) (एक महिला से बार-बार दुष्कर्म), धारा 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात) के आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा “महिला ने 15 जून, 2021 को उस व्यक्ति के साथ एक समझौता किया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि वह पहले से ही शादीशुदा है और एक सप्ताह के लिए उसके और उसकी पत्नी के साथ बारी-बारी से रहेगा. समझौते में यह भी कहा गया कि महिला और पुरुष पिछले दो साल से रिलेशनशिप में थे.”
कोर्ट ने कहा- सहमति से बने शारीरिक संबंध
जज ने कहा “समझौते से साफ है कि महिला और पुरुष लिव-इन रिलेशनशिप में थे. उनके शारीरिक संबंध सहमति से बने थे और युवक पहले से ही शादीशुदा था. उससे शादी करने की स्थिति में नहीं था.” अदालत ने उस व्यक्ति को आरोपों से बरी करते हुए कहा, “ऐसी परिस्थितियों में, इस व्यक्ति को दुष्कर्म और जबरन गर्भपात का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. जहां तक शिकायतकर्ता महिला को जान से मारने की धमकी का सवाल है, रिकॉर्ड पर कोई विश्वसनीय सबूत नहीं हैं.”



