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बंगाल में CBI की एंट्री मामले में केंद्र के खिलाफ याचिका पर होगी सुनवाई, ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत,

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Petition against the Centre in the matter of CBI’s entry in Bengal will be heard, Mamta government gets relief from Supreme Court,

नई दिल्ली। सीबीआई के कथित तौर पर दुरुपयोग के मामले में बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने का फैसला कर लिया है।
ममता सरकार का आरोप है कि राज्य के अधीन आने वाले मामलों को सीबीआई जांच के लिए भेजी जाती है। इसके बाद उन मामलों की एकतरफा जांच होती है। वहीं, इन मामलों पर केद्र सरकार हस्तक्षेप करती है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने माना कि इस याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए।
बंगाल सरकार का कहना है कि सहमति वापस लेने के बावजूद केंद्र सरकार सीबीआई को जांच के लिए राज्य में भेज रही है। राज्य में सीबीआई ने 15 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं।

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ममता सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने दी ये दलील

शीर्ष अदालत ने 8 मई को राज्य द्वारा दायर मुकदमे की विचारणीयता पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया था कि एक बार जब राज्य ने 16 नवंबर, 2018 को अपनी सहमति वापस ले ली थी, तो केंद्र जांच एजेंसी को जांच के लिए राज्य में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकता था। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि केंद्र सरकार या उसके विभाग केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच पर कोई पर्यवेक्षी नियंत्रण नहीं रखते हैं।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य का मुकदमा अपनी योग्यता के आधार पर कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा।

केंद्र सरकार की आपत्तियों को कोर्ट ने किया खारिज

कोर्ट ने कहा कि बिना राज्य सरकार के इजाजत के इस मामले पर सीबीआई जांच कराना सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पश्चिम बंगाल का मुकदमा कानून के मुताबिक शीर्ष अदालत के समक्ष आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की विचारणीयता पर केंद्र सरकार की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सितंबर में अगली सुनवाई करेगा।

फरवरी में हुई थी शाहजहां की गिरफ्तारी

राशन घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम जब शाहजहां शेख को गिरफ्तार करने पहुंची थी, तो वहां हजारों की भीड़ ने ईडी टीम पर हमला कर दिया था. घटना के करीब 55 दिन बाद शाहजहां को गिरफ्तार किया गया. शाहजहां शेख पर हत्या, महिलाओं से यौन उत्पीड़न, जमीन हड़पने, ईडी टीम पर हमले कराने जैसे कई गंभीर आरोप हैं.

इस घटना के बाद भी संदेशखाली में CBI रेड करती रही. अप्रैल के महीने में सीबीआई ने संदेशखाली में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी. संदेशखाली मामले के मुख्य आरोपी शाहजहां शेख के करीबी माने जाने वाले अबु तालेब के दो ठिकानों पर सीबीआई ने रेड की. इस दौरान सीबीआई ने भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया. सीबीआई ने शाहजहां शेख के भाई शेख आलमगीर से भी पूछताछ की थी.

CBI कर रही मामले की जांच

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने शाहजहां शेख को सीबीआई को सौंप दिया था. शाहजहां की कस्टडी के साथ-साथ ईडी पर हमले के केस को भी सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था. सीबीआई इस पूरे मामले की जांच कर रही है.

दोनों पक्षों के तर्क

पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि 16 नवंबर, 2018 को राज्य द्वारा अपनी सहमति वापस लेने के बाद, केंद्र सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में जांच करने की अनुमति नहीं दे सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की सहमति के बिना, सीबीआई की कोई भी कार्रवाई गैरकानूनी होगी।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि न तो केंद्र सरकार और न ही उसके विभाग सीबीआई जांच पर पर्यवेक्षी नियंत्रण रखते हैं। उन्होंने मुकदमे की स्थिरता के बारे में भी प्रारंभिक आपत्तियां उठाईं, और तर्क दिया कि भारत संघ के खिलाफ कार्रवाई का कोई कारण नहीं है।

कानूनी आधार और संवैधानिक संदर्भ

पश्चिम बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत मूल मुकदमा दायर किया। यह अनुच्छेद राज्यों और केंद्र के बीच विवादों को संबोधित करता है और ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है। राज्य ने आरोप लगाया कि उसके क्षेत्र में सीबीआई जांच के लिए सामान्य सहमति वापस लेने के बावजूद, संघीय एजेंसी द्वारा अभी भी एफआईआर दर्ज की जा रही हैं।
केंद्र की आपत्तियों में यह दावा भी शामिल था कि उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई वैध कारण नहीं है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल की चुनौती अब उसके कानूनी तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आगे बढ़ेगी।

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